सीजी भास्कर, 18 जून : छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में नए शैक्षणिक सत्र के पहले दिन जहाँ एक तरफ स्कूलों में नौनिहालों के स्वागत के लिए ‘प्रवेशोत्सव’ का उल्लास देखने को मिला, वहीं दूसरी तरफ कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने वाले सरकारी अमले पर प्रशासन का कड़ा चाबुक भी चला। स्कूलों की व्यवस्थाएं परखने निकले आला अधिकारियों ने पहले ही दिन ड्यूटी से गायब और अनुशासनहीनता बरतने वाले 8 शिक्षकों व संकुल समन्वयकों को रंगे हाथों पकड़ते हुए उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। इस त्वरित कार्रवाई से पूरे बस्तर संभाग के शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है।
अधिकारियों ने अचानक दी दबिश
सत्र के प्रथम दिवस पर स्कूलों की जमीनी हकीकत जानने के लिए जिला मिशन समन्वयक अशोक पाण्डे एवं सहायक कार्यक्रम अधिकारी परमेश्वर पाण्डे द्वारा विकासखण्ड तोकापाल, लोहण्डीगुड़ा एवं बस्तर के कई दूरस्थ विद्यालयों का तूफानी और सघन निरीक्षण किया गया। निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य व्यवस्थाओं का जायजा लेना और बच्चों की उपस्थिति को प्रोत्साहित करना था।
अधिकारियों ने पाया कि जहां अधिकांश स्कूलों में बच्चे नए उमंग के साथ तिलक लगवाकर कक्षाओं में प्रवेश कर रहे थे, वहीं कुछ जगहों पर शिक्षक बेहद लापरवाही भरा रवैया अपनाए हुए थे। कर्तव्य के प्रति इस घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों ने विकासखण्ड बस्तर एवं तोकापाल में कार्यरत 08 लापरवाह शिक्षकों और संकुल समन्वयकों को तत्काल प्रभाव से कारण बताओ नोटिस थमा दिया। अधिकारियों ने दोटूक चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयावधि के भीतर इन सभी की ओर से कोई संतोषप्रद जवाब प्राप्त नहीं होता है, तो सीधे एक दिवस का वेतन काटने की दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
डेली डायरी लिखना अनिवार्य
इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के साथ ही बस्तर जिला शिक्षा विभाग ने स्कूलों के सुचारू और पारदर्शी संचालन को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके तहत सभी शिक्षकों को प्रतिदिन अपनी डेली डायरी प्राथमिकता के साथ अनिवार्य रूप से लिखनी होगी, ताकि बच्चों को क्या पढ़ाया गया, इसका सही मूल्यांकन हो सके।
इसके साथ ही स्कूलों में मिलने वाले मध्याह्न भोजन का नियमित और पूरी तरह से गुणवत्तापूर्ण संचालन करने के आदेश दिए गए हैं, इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सत्र के पहले ही दिन से अनुशासित माहौल बनाने के उद्देश्य से अधिकारियों ने समय पर बच्चों और शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने और उसे अनिवार्य रूप से ऑनलाइन दर्ज करने के निर्देश दिए हैं, ताकि पूरी व्यवस्था पारदर्शी रहे और उच्च स्तर से इसकी सीधी मॉनिटरिंग की जा सके।





