सीजी भास्कर, 7 मई । दुनियाभर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले ब्राउजर Google Chromeको लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। सिक्योरिटी रिसर्चर Alexander Hanff ने आरोप लगाया है कि Chrome कुछ यूजर्स के लैपटॉप और डेस्कटॉप पर बिना अनुमति मांगे करीब 4GB की AI फाइल डाउनलोड कर रहा है। (Big question on Chrome)
रिसर्चर के मुताबिक यह फाइल Google के Gemini Nano AI सिस्टम से जुड़ी है, जिसे Chrome बैकग्राउंड में अपने-आप इंस्टॉल कर देता है। खास बात यह है कि कई यूजर्स को इसकी जानकारी तक नहीं होती।
पहले हार्डवेयर चेक, फिर ऑटो डाउनलोड : Big question on Chrome
रिपोर्ट के अनुसार, Chrome सबसे पहले यह जांचता है कि यूजर का सिस्टम AI मॉडल चलाने के लिए जरूरी हार्डवेयर क्षमता रखता है या नहीं। यदि डिवाइस एलिजिबल पाया जाता है, तो ब्राउजर बैकग्राउंड में AI मॉडल डाउनलोड करना शुरू कर देता है।बताया जा रहा है कि इस प्रक्रिया के दौरान यूजर से किसी तरह की स्पष्ट परमिशन नहीं मांगी जाती। ऐसे में कई लोगों को तब तक इसका पता नहीं चलता, जब तक उनके सिस्टम की स्टोरेज तेजी से भरने न लगे या इंटरनेट डेटा की खपत असामान्य रूप से बढ़ न जाए।
Chrome के AI फीचर्स से जुड़ा है मामला
रिसर्चर का दावा है कि यह डाउनलोड Chrome के ऑन-डिवाइस AI फीचर्स से जुड़ा हुआ है। इनमें AI Writing Help, टेक्स्ट सजेशन और अन्य AI-पावर्ड टूल्स शामिल हैं।Google इन फीचर्स को तेज और प्राइवेट बनाने के लिए AI मॉडल को सीधे यूजर के डिवाइस पर स्टोर कर रहा है, ताकि कुछ प्रोसेसिंग लोकली हो सके।
टेस्ट में सामने आई पूरी प्रक्रिया
Alexander Hanff ने इस दावे की पुष्टि के लिए macOS पर एक कंट्रोल्ड टेस्ट किया। उन्होंने नया Chrome प्रोफाइल बनाकर फाइल सिस्टम एक्टिविटी को मॉनिटर किया। रिपोर्ट के मुताबिक, टेस्ट के दौरान Chrome ने ‘OptGuideOnDeviceModel’ नाम का फोल्डर बनाया और बिना किसी यूजर इंटरैक्शन के करीब 4GB का पेलोड डाउनलोड कर लिया। यह पूरा प्रोसेस लगभग 14 मिनट में पूरा हुआ। (Big question on Chrome)
रिसर्चर का कहना है कि डाउनलोड शुरू होने से पहले Chrome ने सिस्टम की हार्डवेयर क्षमता का भी विश्लेषण किया I


