सीजी भास्कर, 07 मई : भारत सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ (Vande Mataram Protocol) को लेकर नए दिशानिर्देशों और प्रोटोकॉल को मंजूरी देने का प्रस्ताव स्वीकार किया है। अब बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित इस गीत को वही संवैधानिक दर्जा और संरक्षण प्राप्त होगा जो राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को प्राप्त है।
क्या है नया फैसला
सरकार ने ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) में संशोधन के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। इस संशोधन के लागू होते ही वंदे मातरम का अपमान करना एक दंडनीय अपराध माना जाएगा।
अपमान पर क्या होगी सजा
नियमों के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर वंदे मातरम (Vande Mataram Protocol) के गायन में बाधा डालता है या इसके अपमान का दोषी पाया जाता है, तो उसके लिए निम्नलिखित प्रावधान हैं। पहली बार दोषी पाए जाने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। दूसरी बार यदि कोई व्यक्ति दोबारा यही अपराध करता है, तो उसे कम से कम 1 साल के कठोर कारावास की सजा दी जाएगी। इस अधिनियम के तहत राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) का अपमान करना, उसे जलाना, दूषित करना या पैरों तले रौंदना भी गंभीर अपराध है, जिसके लिए भी 3 साल तक की जेल का प्रावधान है।
वंदे मातरम के लिए अनिवार्य प्रोटोकॉल
संशोधित नियमों के तहत अब वंदे मातरम (Vande Mataram Protocol) गाते या बजाते समय इन बातों का ध्यान रखना अनिवार्य होगा। आधिकारिक संस्करण (6 श्लोक) की अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड होगी। इसे प्रमुख राजकीय समारोहों, ध्वजारोहण और संवैधानिक पदों (राष्ट्रपति/राज्यपाल) के कार्यक्रमों में बजाया जाएगा। राष्ट्रगान की तरह ही, वंदे मातरम के गायन के दौरान दर्शकों को ‘सावधान’ (Attention) की मुद्रा में खड़ा होना होगा। यदि किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों होने हैं, तो पहले वंदे मातरम गाया जाएगा, उसके बाद जन गण मन। यदि किसी फिल्म के बीच में बैकग्राउंड स्कोर के रूप में वंदे मातरम बजता है, तो दर्शकों को खड़े होने की आवश्यकता नहीं होगी।


