सीजी भास्कर, 16 मई। रिश्वत मामले में अदालत के फैसले के बाद सरकारी दफ्तरों में इस प्रकरण को लेकर काफी (Bribery Case) चर्चा रही। लंबे समय से चल रहे मामले में अब विशेष अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए सहायक ग्रेड दो के कर्मचारी को दोषी करार दिया है। फैसले के बाद भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर एक बार फिर सख्त कार्रवाई की बात सामने आई है। अदालत परिसर में भी इस निर्णय को लेकर लोगों के बीच बातचीत होती रही।
विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण हेमंत सराफ की अदालत ने गौतम सिंह आयम को रिश्वत मामले में दोषी मानते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही आरोपी पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
एरियर राशि के बदले मांगी थी रिश्वत : Bribery Case
अभियोजन पक्ष के अनुसार प्रार्थी नितेश रंजन पटेल वर्ष 2013 से 2017 तक की लंबित एरियर राशि प्राप्त करने के लिए विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय वाड्रफनगर पहुंचे थे। कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड दो गौतम सिंह आयम ने सेवा पुस्तिका का सत्यापन कराने और एरियर बिल तैयार कर कोष लेखा एवं पेंशन कार्यालय अंबिकापुर में जमा कराने के एवज में रिश्वत की मांग की थी।
20 हजार से घटाकर 12 हजार में हुई बात
जानकारी के मुताबिक शुरुआत में आरोपी ने 20 हजार रुपये की मांग की थी। बाद में बातचीत के दौरान वह 12 हजार रुपये लेने के लिए तैयार हो गया। प्रार्थी रिश्वत देने के पक्ष में नहीं था। इसके बाद उसने एंटी करप्शन ब्यूरो अंबिकापुर में शिकायत दर्ज कराई।
एसीबी ने बिछाया जाल
शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले का सत्यापन (Bribery Case) किया। जांच सही पाए जाने पर 13 अगस्त 2024 को ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई गई। रिश्वत की तय रकम के साथ आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने की कार्रवाई की गई थी। इसके बाद मामले की सुनवाई विशेष अदालत में चल रही थी।
अदालत ने माना गंभीर अपराध
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत ऐसे अपराध गंभीर श्रेणी में आते हैं। अदालत ने कहा कि इस तरह के मामलों में नरमी नहीं बरती जा सकती। अदालत ने आरोपी को तीन वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना जमा नहीं करने पर एक माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
जेल में बिताई अवधि सजा में होगी शामिल
जानकारी के मुताबिक आरोपी 14 अगस्त 2024 से 13 नवंबर 2024 तक न्यायिक अभिरक्षा (Bribery Case) में रहा था। अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के तहत इस अवधि को सजा में समायोजित करने के निर्देश भी दिए हैं।



