सीजी भास्कर, 18 अप्रैल : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक अनोखी शादी (Bride Baraat Wedding) सामने आई है, जिसने पारंपरिक विवाह रीति-रिवाजों को पूरी तरह उलट कर रख दिया है। यहां दुल्हन खुद बारात लेकर दूल्हे के घर पहुंची, शादी की और फिर दूल्हे को विदा कराकर अपने घर ले गई।
दुल्हन बनी बाराती, परंपरा बदली
यह अनोखी शादी सरगुजा जिले के सुलपगा गांव में संपन्न हुई, जहां दुल्हन देवमुनि एक्का और दूल्हा बिलासुस बरवा ने मसीही परंपरा से विवाह किया। इस शादी की खास बात यह रही कि यहां कन्यादान नहीं बल्कि ‘वरदान’ की परंपरा निभाई गई। शादी (Bride Baraat Wedding) में सभी रस्में पूरी विधि-विधान से हुईं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उस पल की रही जब विदाई के दौरान दूल्हा भावुक होकर रो पड़ा।
विदाई में फूट-फूटकर रोया दूल्हा
विवाह के बाद जब विदाई की रस्म शुरू हुई, तो दूल्हे का हाथ दुल्हन को सौंपा गया और दुल्हन उसे अपने साथ ले जाने लगी। इस दौरान दूल्हा फूट-फूटकर रोने लगा, ठीक वैसे ही जैसे आमतौर पर दुल्हनें विदाई के समय रोती हैं। यह दृश्य शादी (Bride Baraat Wedding) को और भी खास बना गया और वहां मौजूद लोग भी भावुक हो उठे।
आखिर क्यों हुई ऐसी शादी
इस अनोखी शादी (Bride Baraat Wedding) के पीछे एक खास वजह है। दुल्हन देवमुनि एक्का के परिवार में कोई बेटा नहीं है। वे चार बहनें हैं और उनके पिता मोहन एक्का खेती-किसानी करते हैं।
परिवार को एक बेटे की जरूरत थी, जो घर और जिम्मेदारियों को संभाल सके। ऐसे में दोनों परिवारों की सहमति से यह तय किया गया कि दूल्हा शादी के बाद दुल्हन के घर ही रहेगा। इसी निर्णय के तहत यह अनोखी परंपरा अपनाई गई, जिसमें दुल्हन बारात लेकर दूल्हे के घर पहुंची और शादी के बाद उसे अपने साथ ले गई।
दुल्हन के पिता मोहन एक्का ने कहा कि यह फैसला समाज के लिए भले ही अलग हो, लेकिन उनके परिवार के लिए जरूरी था। उन्होंने दूल्हे को बेटे की तरह अपने घर लाने का निर्णय लिया है। यह अनोखी शादी (Bride Baraat Wedding) अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इसे सामाजिक बदलाव की मिसाल के रूप में देख रहे हैं।



