सीजी भास्कर, 07 जुलाई : छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बने दो रेलवे ओवरब्रिज (Bridge Crack) पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो गए हैं। लोकार्पण के महज 15 दिन बाद बरगा रेलवे ओवरब्रिज के बीचों-बीच करीब 60 से 70 फीट लंबी और 10 से 12 सेंटीमीटर चौड़ी दरारें पड़ गईं, जबकि आलीवारा ओवरब्रिज पर सड़क बहने, बेस धंसने और बाउंड्री टूटने की घटनाओं ने निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों पुलों के निर्माण पर लगभग 22 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।
पहली बारिश में सामने आई बड़ी खामियां
रविवार को हुई बारिश के बाद बरगा रेलवे ओवरब्रिज (Bridge Crack) की सड़क बीच से फटकर दो हिस्सों में बंट गई। पुल पर लंबी दरारें दिखाई देने के बाद स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। वहीं आलीवारा ओवरब्रिज पर सड़क का हिस्सा बह गया, किनारों की बाउंड्री टूट गई और कई स्थानों पर बेस धंस गया। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर दी है।
ग्रामीणों ने निर्माण गुणवत्ता पर उठाए सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ओवरब्रिज (Bridge Crack) के निर्माण में निम्न गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि सीमेंट और डामर आसानी से उखड़ रहे हैं, जिससे निर्माण कार्य में लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की आशंका गहरा गई है। लोगों ने रेलवे और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन भी किया।
रेलवे ने निरीक्षण का दिया भरोसा
गोंदिया रेलवे के असिस्टेंट इंजीनियर मिथिलेश कुमार ने कहा कि तकनीकी टीम मौके का निरीक्षण करेगी और आवश्यक सुधार किए जाएंगे। उनका कहना है कि शुरुआती बारिश के बाद मिट्टी बैठने की प्रक्रिया के कारण ऐसी स्थिति बनी हो सकती है। वहीं निर्माण कंपनी घई कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर राजेंद्र सिंह घई ने दावा किया कि पुल पूरी तरह सुरक्षित है और धंसने का कोई खतरा नहीं है।
कोरबा में भी पहली बारिश में टूटी 3 करोड़ की पुलिया
राजनांदगांव के अलावा कोरबा जिले के करतला विकासखंड के भैसामुड़ा गांव में जोगीनाला पर करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से बनी पुलिया भी पहली ही बारिश में बह गई। तेज बहाव में पुलिया का एक हिस्सा टूट गया, जिससे सड़क पर गहरे गड्ढे बन गए और आवागमन बाधित हो गया। ग्रामीणों ने निर्माण में अनियमितता और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है।
बढ़ी जांच और कार्रवाई की मांग
लगातार सामने आ रहे निर्माण कार्यों में खामियों के बाद स्थानीय लोगों ने जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पहली ही बारिश में पुल और पुलिया क्षतिग्रस्त होना गंभीर लापरवाही का संकेत है।



