सीजी भास्कर, 6 सितंबर : जातिगत जनगणना के फॉर्म (Caste Census Form) को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। महाराष्ट्र कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता नाना भाऊ पटोले ने मौजूदा प्रश्नावली को दोषपूर्ण बताते हुए इसमें बदलाव की मांग की है। उनका कहना है कि जातियों की सही गिनती नहीं हुई तो इसका असर सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों पर पड़ेगा।
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रायपुर में पत्रकारवार्ता, प्रश्नावली पर उठाए सवाल
रायपुर में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत की मौजूदगी में पत्रकारवार्ता आयोजित की गई। यहां पटोले ने जातिगत जनगणना के फॉर्म (Caste Census Form) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
कांग्रेस ने जातियों की गिनती के लिए पहले से प्रमाणित जातियों की ड्रॉपडाउन लिस्ट तैयार करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि इससे जातियों के नाम और आंकड़ों में होने वाली गड़बड़ियों को रोका जा सकेगा।
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ओपन विकल्प से एक जाति के कई नाम दर्ज होने का डर
नाना भाऊ पटोले ने प्रश्नावली के सवाल नंबर 10 पर सबसे ज्यादा आपत्ति जताई। कांग्रेस के मुताबिक, इसमें जाति का नाम लिखने के लिए ओपन-एंडेड विकल्प दिया गया है।
पटोले का कहना है कि इस व्यवस्था में व्यक्ति अपनी जाति या उपजाति का जो नाम बताएगा, गणनाकर्मी उसे उसी रूप में दर्ज करेगा। अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में एक ही जाति को अलग नाम, बोली या अलग स्पेलिंग से जाना जाता है।
ऐसे में एक ही जाति के कई नाम दर्ज हो सकते हैं। इससे आंकड़ों में अंतर आने की आशंका है। कांग्रेस का कहना है कि इससे जातियों की वास्तविक आबादी का सही अनुमान लगाना मुश्किल हो सकता है।
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OBC की सही संख्या सामने नहीं आने की आशंका
कांग्रेस ने दावा किया कि मौजूदा प्रश्नावली में ‘पिछड़ा वर्ग’ शब्द तक शामिल नहीं किया गया है। पटोले के मुताबिक, इसका असर ओबीसी, ईबीसी और अन्य वंचित वर्गों पर पड़ सकता है।
यदि एक ही जाति के नाम अलग-अलग तरीके से दर्ज हुए तो उसकी वास्तविक संख्या कम या अलग-अलग हिस्सों में बंटी हुई दिखाई दे सकती है। कांग्रेस का कहना है कि इसका असर आरक्षण, सरकारी नौकरी, शिक्षा, छात्रवृत्ति और कल्याणकारी योजनाओं में हिस्सेदारी तय करने पर पड़ सकता है।
कांग्रेस का सवाल है कि जब जातियों की सूचियां पहले से मौजूद हैं तो उन्हें जनगणना के फॉर्म (Caste Census Form) में शामिल क्यों नहीं किया गया।
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कांग्रेस का सवाल- सूची मौजूद है तो इस्तेमाल क्यों नहीं?
नाना भाऊ पटोले ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के पास पहले से जातियों की सूचियां उपलब्ध हैं। ऐसे में जातिगत जनगणना में इनका इस्तेमाल ड्रॉपडाउन सूची के रूप में किया जा सकता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब ओबीसी जातियों की सूची पहले से मौजूद है तो उसे जातिगत जनगणना की प्रश्नावली में शामिल क्यों नहीं किया गया।
कांग्रेस ने मांग की है कि जातिगत जनगणना की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और आम लोगों से चर्चा की जाए। सुझावों के आधार पर नई प्रश्नावली तैयार करने की भी मांग की गई है।
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2021 से जातिगत जनगणना की मांग का दावा
पटोले ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से जातिगत जनगणना की मांग करती रही है। कांग्रेस के मुताबिक, यह मांग 2021 से लंबित थी और राहुल गांधी 2023 से लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे हैं।
कांग्रेस ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जातिगत जनगणना को लेकर पत्र लिखे हैं। पार्टी का दावा है कि खरगे की ओर से 2023 और 2025 में भी इस संबंध में पत्र भेजे गए थे।
कांग्रेस के अनुसार, 30 अप्रैल 2025 को केंद्र सरकार ने 2027 से जातिगत जनगणना कराने की घोषणा की थी। अब पार्टी ने प्रश्नावली के प्रारूप पर सवाल उठाए हैं।
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कांग्रेस बोली- अभी सुधार का समय
कांग्रेस का कहना है कि अभी देशभर में जातिगत जनगणना का काम शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में केंद्र सरकार के पास प्रश्नावली में जरूरी बदलाव करने का समय है।
पटोले ने कहा कि कांग्रेस “सही गिनती, सही आंकड़े और सही हिस्सेदारी” की मांग से पीछे नहीं हटेगी। उनके मुताबिक, जातिगत जनगणना के आंकड़े केवल संख्या नहीं हैं। ये सामाजिक न्याय और विभिन्न वर्गों की हिस्सेदारी तय करने का आधार भी बन सकते हैं।




