सीजी भास्कर, 30 जून। साइबर अपराधियों ने लोगों को ठगने के लिए नया तरीका अपनाया है, जिसे (CEO ZIP Fraud) या CEO इम्पर्सनेशन स्कैम कहा जा रहा है। इस साइबर फ्रॉड में ठग किसी कंपनी के सीईओ, डायरेक्टर या वरिष्ठ अधिकारी बनकर कर्मचारियों को व्हाट्सएप या ई-मेल के जरिए संदेश भेजते हैं और उसके साथ ZIP फाइल साझा करते हैं। जैसे ही पीड़ित उस फाइल को डाउनलोड या ओपन करता है, उसका मोबाइल मैलवेयर की चपेट में आकर हैक हो सकता है।
ZIP फाइल के जरिए मोबाइल में पहुंचता है मैलवेयर
गृह मंत्रालय और साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ठग कर्मचारियों पर तत्काल कार्रवाई का दबाव बनाते हैं। वे सिक्योरिटी अपडेट, जरूरी दस्तावेज या तत्काल भुगतान का बहाना बनाकर ZIP फाइल खोलने के लिए कहते हैं। फाइल के भीतर मौजूद EXE या DLL जैसी हानिकारक फाइलें डाउनलोड होते ही मोबाइल संक्रमित हो जाता है, जिससे साइबर अपराधी बैंकिंग ऐप, ओटीपी और अन्य संवेदनशील जानकारियों तक पहुंच बना सकते हैं।
मोबाइल हैक कर बदल देते हैं संपर्क नंबर
विशेषज्ञों का कहना है कि कई मामलों में ठग मोबाइल हैक करने के बाद असली अधिकारी का नंबर हटाकर अपना नंबर सेव कर देते हैं। इसके बाद वे फर्जी निर्देश देकर कर्मचारियों या कंपनियों से बड़ी रकम ट्रांसफर करा लेते हैं। आंकड़ों के मुताबिक पिछले 30 महीनों में केवल छत्तीसगढ़ में साइबर ठगी के जरिए करीब 791 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हो चुकी है।
रायपुर पुलिस ने 101 म्यूल अकाउंट धारकों को पकड़ा
साइबर अपराधों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए रायपुर पुलिस ने 101 म्यूल अकाउंट धारकों को गिरफ्तार किया है। इन बैंक खातों के जरिए देशभर में करीब 1.57 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की गई थी। पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भी खुलासा किया, जो अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर संचालित कर अमेरिकी नागरिकों को निशाना बना रहा था और दो वर्षों में 50 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी को अंजाम दे चुका था।
साइबर विशेषज्ञों ने दी यह सलाह
साइबर विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी अधिकारी के नाम से प्राप्त संदिग्ध ZIP फाइल या संदेश पर बिना पुष्टि किए भरोसा न करें। किसी भी भुगतान या महत्वपूर्ण निर्देश का पालन करने से पहले संबंधित अधिकारी से फोन, वीडियो कॉल या अन्य माध्यम से पुष्टि अवश्य करें। इसके अलावा व्हाट्सएप पर टू-स्टेप वेरिफिकेशन सक्रिय रखें और किसी भी अनजान ZIP, EXE या DLL फाइल को डाउनलोड या ओपन करने से बचें।
यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की साइबर ठगी का शिकार होता है, तो उसे तुरंत अपने बैंक और यूपीआई सेवा प्रदाता को सूचना देनी चाहिए, राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करना चाहिए, साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए तथा स्क्रीनशॉट, बैंक ट्रांजैक्शन और कॉल रिकॉर्ड जैसे सभी डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने चाहिए।



