सीजी भास्कर, 01 जून : छत्तीसगढ़ के बुनियादी ढांचे और सड़क परिवहन (CG Bharatmala Expressway) के इतिहास में इस साल के अंत तक एक बहुत ही सुनहरा और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। पिछले कई सालों से भारी वाहनों, ट्रकों और डंपरों के बढ़ते जानलेवा दबाव से जूझ रही राजधानी रायपुर और दुर्ग-भिलाई की आम जनता को जल्द ही जाम और प्रदूषण से हमेशा-हमेशा के लिए बड़ी राहत मिलने जा रही है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना के तहत तैयार हो रहा 92 किलोमीटर लंबा अत्याधुनिक आरंग-दुर्ग बायपास व 6 लेन इकोनॉमिक कॉरिडोर अब अपने बिल्कुल अंतिम चरण में पहुंच गया है।
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, इस मेगा प्रोजेक्ट का लगभग 80 प्रतिशत से ज्यादा निर्माण कार्य पूरी तरह से मुकम्मल हो चुका है। इस बहुप्रतीक्षित एक्सप्रेस-वे के पूरी तरह से शुरू होते ही रायपुर शहर के भीतर के मुख्य मार्गों से गुजरने वाले भारी ट्रकों का दबाव काफी हद तक खत्म हो जाएगा। खासकर रिंग रोड नंबर-1 और मुख्य शहरी अंदरूनी मार्गों पर ट्रैफिक का जानलेवा बोझ घटने से रोजाना अपनी बाइक और कारों से दफ्तर और कॉलेज आने-जाने वाले स्थानीय लोगों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी। राजधानी के लोग अब इस बदलाव (CG Bharatmala Expressway) के धरातल पर उतरने का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
यह शानदार कॉरिडोर केवल रायपुर की जनता को जाम से ही मुक्ति नहीं दिलाएगा, बल्कि यह छत्तीसगढ़ राज्य को पड़ोसी राज्य ओडिशा, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल से बेहद तेज, आधुनिक और सीधी सड़क कनेक्टिविटी देकर पूरे मध्य भारत के व्यापार और परिवहन को भी एक नई और अकल्पनीय रफ्तार प्रदान करेगा। एक्सप्रेस-वे पर भविष्य में वाहनों के व्यवस्थित और सुरक्षित यातायात संचालन के लिए छह विशेष एंट्री-एग्जिट प्वाइंट और प्रमुख जंक्शन (इंटरचेंज) विकसित किए जा रहे हैं, ताकि दूर और लंबी दूरी के राज्यों से आने वाले मालवाहक वाहनों को शहर के व्यस्त रिहायशी इलाकों में प्रवेश किए बिना ही सीधा और साफ रास्ता मिल सके। अधिकारियों की पूरी टीम दिन-रात काम में जुटी हुई है ताकि इस कॉरिडोर (CG Bharatmala Expressway) का तोहफा प्रदेश की जनता को तय समय सीमा यानी इसी दिसंबर महीने तक हर हाल में सौंप दिया जाए।
जानिए कहां से गुजरेगी यह विकास की नई जीवनरेखा
धरती का सीना चीरकर बनाई जा रही करीब 2281 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत वाली इस पूरी विशाल परियोजना को निर्माण की सुगमता के लिए दो अलग-अलग हिस्सों (पैकेजों) में तैयार किया जा रहा है। पहले चरण के अंतर्गत राजनांदगांव के पास टेडेसरा से लेकर ग्राम खट्टी तक लगभग 44 किलोमीटर लंबी चमचमाती सड़क का निर्माण अंतिम दौर में किया जा रहा है, जबकि परियोजना के दूसरे चरण में खट्टी से शुरू होकर आरंग तक करीब 48.5 किलोमीटर का लंबा हिस्सा तेजी से विकसित किया जा रहा है।
अगर इस मार्ग के पूरे रूट मैप को समझें, तो भारतमाला परियोजना के तहत तैयार हो रहा यह विश्वस्तरीय 6 लेन इकोनॉमिक कॉरिडोर राजनांदगांव जिले के टेडेसरा से विधिवत शुरू होगा। यहां से यह मार्ग सीधे दुर्ग जिले की सीमा में प्रवेश करते हुए थनौद, उतई और पाटन के ग्रामीण अंचलों के खेतों और हरियाली से होकर आगे बढ़ेगा। इसके बाद यह विशाल सड़क अभनपुर के पास जगदलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-30) को ऊपर से क्रॉस करेगी और फिर नवा रायपुर में खूबसूरत जंगल सफारी के ठीक पीछे से गुजरते हुए सीधे आरंग में जाकर मुख्य हाईवे से मिल जाएगी। वनांचल और ग्रामीण इलाकों की जमीनों से गुजरता हुआ यह चौड़ा रास्ता ग्रामीण विकास (CG Bharatmala Expressway) के बंद पड़े बंद दरवाजों को हमेशा के लिए खोलने का दम रखता है।
स्टील, ऑटोमोबाइल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और एग्री प्रोडक्ट को मिलेगा बूम
आर्थिक मामलों और सड़क बुनियादी ढांचे के विशेषज्ञों के मुताबिक, इस नए इकोनॉमिक कॉरीडोर के चालू होने से छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े उद्योगों जैसे स्टील, ऑटोमोबाइल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि से जुड़े एग्री प्रोडक्ट्स के पूरे कारोबार को एक बहुत बड़ा उछाल (बूम) मिलेगा। रायपुर ऑटोमोबाइल्स डीलर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष कैलाश खेमानी ने इस पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि नए एक्सप्रेस-वे के बन जाने से दूसरे राज्यों के बीच का फासला और दूरी तय करने में लगने वाले कीमती समय की भारी बचत होगी, जिससे गाड़ियों की डिलीवरी समय पर हो सकेगी।
वहीं दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन के महासचिव मनीष धुप्पड़ ने बताया कि भारी माल ढुलाई वाले स्टील सेक्टर को इस नए और चौड़े कॉरीडोर से सड़क परिवहन में बहुत ज्यादा आर्थिक मदद मिलेगी और डीजल का खर्च भी काफी कम हो जाएगा। इस नजरिए से देखा जाए तो यह उद्योगों की तरक्की (CG Bharatmala Expressway) के लिए एक बड़ा वरदान साबित होने वाला है।
10 बड़े पुल और 30 अंडरपास के साथ सफर होगा पूरी तरह सिग्नल-फ्री
वाहनों की सुरक्षा और बिना रुके सफर को जारी रखने के लिए इस पूरे प्रोजेक्ट के रूट में 10 बड़े पुलों और करीब 30 आधुनिक अंडरपास का निर्माण बहुत ही सूझबूझ के साथ किया जा रहा है। यह बायपास न केवल अंतर-राज्यीय व्यापार और भारी माल ढुलाई को तीव्र और सुगम करेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ के प्रमुख औद्योगिक शहरों के बीच बिना किसी बाधा के सिग्नल-फ्री और अत्यधिक सुरक्षित आवागमन भी सुनिश्चित करेगा।
इस ड्रीम प्रोजेक्ट में सफर को पूरी तरह से सिग्नल-फ्री, दुर्घटना-मुक्त और जाम-मुक्त बनाने का एक बड़ा लक्ष्य रखा गया है, ताकि जो दूरी तय करने में पहले भारी वाहनों को चार से पांच घंटे का समय लगता था, उसे अब मात्र एक घंटे में सुरक्षित तरीके से पूरा किया जा सके। कुल मिलाकर, प्रकृति के सुंदर नजारों के बीच से गुजरने वाला यह नया एक्सप्रेस-वे छत्तीसगढ़ के बदलते और आधुनिक होते स्वरूप की एक बेहद खूबसूरत और शानदार तस्वीर देश के सामने पेश करेगा। यह नया प्रोजेक्ट छत्तीसगढ़ की समृद्धि (CG Bharatmala Expressway) के सफर में चार चांद लगाने के लिए पूरी तरह तैयार है।




