सीजी भास्कर, 31 मई : छत्तीसगढ़ की दुर्ग और भिलाई पुलिस ने अंतर्राज्यीय (इंटर-स्टेट) अपराधियों के एक बेहद शातिर, खौफनाक और हाईटेक गिरोह (CG Durg Interstate Theft) के नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने में एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने कई राज्यों में आतंक का पर्याय बन चुके इस गिरोह के मास्टरमाइंड और मुख्य आरोपी मोहम्मद नासिर हुसैन उर्फ आनस खान को कड़े पुलिस रिमांड पर लेकर जब सख्ती से पूछताछ की, तो राजधानी रायपुर से लेकर दुर्ग तक फैले उनके काले साम्राज्य का एक ऐसा सनसनीखेज सस्पेंस खुलकर सामने आया जिसे सुनकर खुद पुलिस अधिकारी भी दंग रह गए।
पुलिस ने आरोपी की कड़े लाइव लोकेशन की निशानदेही पर रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा अस्पताल) परिसर से चोरी में इस्तेमाल होने वाले कस्टमाइज्ड औजार और वारदात में प्रयुक्त होने वाली स्कूटी को बरामद कर लिया है। इस बड़ी कूटनीतिक सफलता (CG Durg Interstate Theft) के बाद से पुलिस महकमे के सुशासन की साख और ज्यादा मजबूत हो गई है।
दरअसल, यह पूरा मामला केवल एक मामूली चोरी का नहीं है, बल्कि इसके पीछे सरकारी विभागों की आंखों में धूल झोंककर राजधानी के सबसे व्यस्ततम मेडिकल परिसर को ही अपना हिडन अड्डा बनाने का एक बेहद शातिर सस्पेंस छुपा हुआ था। आरोपी और उसके गैंग के सदस्य पहले दुर्ग, भिलाई और रायपुर के पॉश इलाकों, सूने फ्लैटों और बंद कॉलोनियों की कई दिनों तक कड़ाई से रेकी (अनुमान) करते थे।
इसके बाद जब मकान मालिक घर से बाहर होते, तो ये कड़ा कदम (CG Durg Interstate Theft) उठाते हुए धावा बोल देते थे। घरों के मुख्य दरवाजों के ताले तो चंद सेकंड में कटर से काट दिए जाते थे, जबकि अलमारी और डिजिटल लॉकर खोलने के लिए ये लोग लोहे की रॉड, पेचकस, पाना और विशेष तौर पर लुहारों से डिजाइन करवाए गए कस्टमाइज्ड टूल्स का इस्तेमाल करते थे ताकि काम के ढर्रे में कोई रुकावट न आए।
स्कूटी की डिक्की से खुले गुनाहों के कड़े राज
इस अंतर्राज्यीय चोर गिरोह के काम करने के ढर्रे का सबसे चौंकाने वाला और आक्रामक पहलू यह था कि इन्होंने पुलिस की नजरों से बचने के लिए रायपुर के मेकाहारा अस्पताल की बेहद व्यस्त पार्किंग को अपना मुख्य हथियार बनाया था। आरोपी नासिर ने रिमांड में कबूला कि वे अपनी चोरी की कस्टमाइज्ड एक्टिवा स्कूटी को हमेशा इसी अस्पताल की नो-मैन लैंड पार्किंग में लावारिस की तरह खड़ा कर देते थे, जिससे किसी को शक न हो।
चोरी में इस्तेमाल होने वाले सभी कटर, पाना और कस्टमाइज्ड पेचकस स्कूटी की सीट के नीचे (डिक्की में) हमेशा छिपे रहते थे। वे इसी वाहन से रायपुर से भिलाई-दुर्ग के कड़े सफर पर निकलते थे और वारदातों को अंजाम देकर वापस रायपुर भाग आते थे। अस्पताल की भीड़भाड़ के कारण पुलिस को उनकी इस संदिग्ध गतिविधि का कभी भनक तक नहीं लगा। इस शातिर व्यवस्था के कारण होने वाले भारी आर्थिक नुकसान (CG Durg Interstate Theft) से अब दुर्ग-भिलाई के नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी।
लेकिन, इस गिरोह को दबोचने के लिए दुर्ग पुलिस की एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) ने जो आक्रामक और फिल्मी चक्रव्यूह रचा, उसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है। आरोपियों तक पहुंचने और उनके गुप्त ठिकानों का सस्पेंस तोड़ने के लिए पुलिस के जांबाज अधिकारियों ने अपनी पहचान पूरी तरह छुपा ली थी। इलाके में सुराग जुटाने के लिए पुलिसकर्मी बकायदा ‘बकरा व्यापारी’ और ‘जनगणना करने वाले सरकारी कर्मचारी’ बनकर कड़े नियम (CG Durg Interstate Theft) के तहत गलियों में खाक छानते रहे। पुलिस के भेष बदलने के इस कड़े फैसले के बाद ही गिरोह की गतिविधियों में एक बड़ा बदलाव (CG Durg Interstate Theft) आया और पुलिस को वह सटीक इनपुट मिला, जिसके दम पर मुख्य आरोपी को रिमांड पर लेकर सलाखों के पीछे धकेला जा सका।
भोपाल से लेकर चंडीगढ़ तक दर्ज हैं दर्जनों मुकदमे
दुर्ग पुलिस की जांच और कड़े कूटनीतिक रिकॉर्ड खंगालने पर यह बात पूरी तरह साफ हो गई है कि मोहम्मद नासिर हुसैन उर्फ आनस खान कोई छोटा-मोटा अपराधी नहीं है, बल्कि उसका पूरा आपराधिक इतिहास कई राज्यों की सीमाओं को लांघ चुका है। आरोपी ने पुलिस की कड़ाई के आगे घुटने टेकते हुए कबूल किया है कि उसने मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, छिंदवाड़ा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ जैसे बड़े शहरों में चोरी की दर्जनों बड़ी और सनसनीखेज वारदातों को अंजाम दिया है।




