सीजी भास्कर, 31 मई : छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में पुलिस और एंटी नारकोटिक टास्क फोर्स (CG Mahasamund Ganja Seizure) की टीम ने नशीले पदार्थों के काले कारोबार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। ओडिशा बॉर्डर से लेकर महाराष्ट्र तक फैलाए गए अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने करीब 3 करोड़ रुपये की कीमत का 6 क्विंटल (600 किलोग्राम) मादक पदार्थ गांजा रंगे हाथों बरामद किया है।
तस्करों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंककर सुरक्षा घेरा तोड़ने के लिए कंपनी के मशीनरी सामान और बड़े कार्टूनों के नीचे इन नशीली बोरियों को छिपा रखा था। मौके से लाल रंग के भारी मालवाहक वाहन, मोबाइल और नकदी समेत कुल 3 करोड़ 12 लाख 15 हजार रुपये की समूची संपत्ति जब्त की गई है। इस बड़ी सफलता के बाद से ही तस्करों के पूरे नेटवर्क में हड़कंप मच गया है।
दरअसल, यह पूरा मामला केवल एक खेप को पकड़ने का नहीं है, बल्कि इसके पीछे राज्यों की सीमाओं को लांघकर चल रहे तस्करों के काम करने के चालाक तरीके की कहानी है। पुलिस के आला अधिकारियों को गुप्त सूचना मिली थी कि टाटा माजदा वाहन में कुछ संदिग्ध सामान लादकर उसे काले त्रिपाल से ढंककर महाराष्ट्र की ओर रवाना किया गया है ताकि बाहर से देखने पर वह एक सामान्य मालवाहक लगे। इसी सटीक इनपुट के आधार पर सिंघोड़ा थाना क्षेत्र के मुरमुरी चौक पर पुलिस ने नाकेबंदी कर वाहनों की बारीकी से सघन जांच शुरू कर दी।
24 प्लास्टिक बोरियों में भरा था नशा
मुरमुरी चौक पर जब पुलिस ने उस संदिग्ध लाल रंग के वाहन को रोककर तलाशी ली, तो वाहन चालक घबरा गया। पुलिस पूछताछ के सामने घुटने टेकते हुए चालक ने अपना नाम महबूब बादशाह शेख बताया, जो महाराष्ट्र के ठाणे जिले का स्थायी निवासी है। जब पुलिस की टीम ने वाहन के भीतर लदे कंपनी के मशीनरी सामान और बड़े-बड़े भारी कार्टूनों को हटाना शुरू किया, तो नीचे का नजारा देखकर अफसरों के भी होश उड़ गए।
“मशीनरी के आवरण के ठीक नीचे भारी मात्रा में 24 प्लास्टिक की बोरियां ठूंस-ठूंस कर छिपाई गई थीं। जब प्रत्येक बोरी को खोलकर तौला गया, तो सभी में 25-25 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता का गांजा भरा हुआ पाया गया, जिसका कुल वजन 600 किलो (6 क्विंटल) निकला।”
मौके पर ही ड्रग्स को एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों के तहत सील कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। इस बड़ी खेप की बरामदगी से छत्तीसगढ़ से गुजरने वाले तस्करों के व्यापारिक मंसूबों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा है।
एंबुलेंस और गुप्त चैंबरों से खुली चुनौती
पुलिस की कड़ाई से हुई पूछताछ में मुख्य आरोपी महबूब बादशाह ने इस पूरे रैकेट के नेटवर्क का एक और बड़ा खुलासा कर दिया है। उसने स्वीकार किया कि गांजे की यह विशाल खेप ओडिशा के बौद्ध जिले के जंगलों से लोड की गई थी और इसे सीधे महाराष्ट्र के ठाणे में बैठे बड़े नशा माफियाओं तक सुरक्षित डिलीवर किया जाना था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस बड़े नेटवर्क के तार कई अन्य लोगों से भी जुड़े हुए हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें अलग-अलग राज्यों में छापेमारी कर रही हैं।




