सीजी भास्कर, 03 जून : छत्तीसगढ़ में राजस्व विभाग की सेवाएं अगले कुछ दिनों तक गंभीर रूप से प्रभावित (CG Revenue Officers Strike) रहने वाली हैं। प्रदेशभर के तहसीलदार और नायब तहसीलदार आंदोलन पर चले गए हैं, जिसके चलते तहसील कार्यालयों में कामकाज लगभग ठप हो गया है। हड़ताल के कारण आम नागरिकों के जरूरी दस्तावेजों से जुड़े काम अटक गए हैं, वहीं राजस्व न्यायालयों में मामलों की सुनवाई भी प्रभावित हो रही है। अधिकारियों के आंदोलन के चलते 7 जून तक स्थिति सामान्य होने की संभावना नहीं है।
सीतापुर घटना बनी आंदोलन की वजह
इस आंदोलन (CG Revenue Officers Strike) की जड़ हाल ही में सरगुजा जिले के सीतापुर में हुई वह घटना है, जिसमें एक नायब तहसीलदार के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार और मारपीट की गई थी। राजस्व अधिकारियों का कहना है कि घटना के बाद सीतापुर के बीजेपी विधायक रामकुमार टोप्पो के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। शासन स्तर पर चर्चा और आश्वासन के बावजूद जब ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो तहसीलदार और नायब तहसीलदार संघ ने सामूहिक हड़ताल का फैसला लिया।
सुनवाई टली, बढ़ेगी लंबित मामलों की संख्या
हड़ताल का असर तहसील न्यायालयों की कार्यवाही पर भी दिखाई देने लगा है। जिन मामलों की सुनवाई इस सप्ताह निर्धारित थी, उनकी तारीखें आगे बढ़ाई जा रही हैं। 2 जून को सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई अब 8 जून को होगी, जबकि 3, 4 और 5 जून के मामलों को भी अगले सप्ताह के लिए स्थगित किया जा रहा है। इससे पहले से लंबित प्रकरणों का बोझ और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
प्रमाण पत्र से लेकर नामांतरण तक सभी काम प्रभावित
राजस्व अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, मूल निवास, नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, खसरा सुधार, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य राजस्व संबंधी प्रक्रियाएं प्रभावित हो गई हैं। कई आवेदनों का निराकरण निर्धारित समय पर नहीं हो पा रहा है, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी नहीं होने से लौटे लोग
प्रदेश के कई जिलों में लोग अपने निर्धारित कार्यों और पेशियों के लिए तहसील कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां हड़ताल के कारण कामकाज बंद मिला। पर्याप्त जानकारी नहीं होने के कारण अनेक लोगों को बिना काम कराए वापस लौटना पड़ा। राजधानी रायपुर समेत कई जिलों के तहसील परिसरों में दिनभर सन्नाटा नजर आया।
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
राजस्व अधिकारियों के आंदोलन (CG Revenue Officers Strike) को कांग्रेस ने समर्थन दिया है। कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया कि सरकार घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उन्हें संरक्षण दे रही है। उन्होंने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और दोषियों पर निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए।
कार्रवाई में देरी पर उठ रहे सवाल
विपक्ष का कहना है कि घटना को एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि यदि किसी जनप्रतिनिधि को किसी अधिकारी की कार्यप्रणाली पर आपत्ति थी, तो उसके लिए वैधानिक और प्रशासनिक रास्ते उपलब्ध थे। ऐसे मामलों में हिंसा या दबाव की राजनीति स्वीकार्य नहीं हो सकती।
प्रदेशभर में जारी इस आंदोलन के कारण हजारों आवेदनों और सैकड़ों राजस्व प्रकरणों पर असर पड़ रहा है। अब सभी की नजर सरकार और राजस्व अधिकारियों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी हुई है, जिससे हड़ताल समाप्त होने का रास्ता निकल सके।




