सीजी भास्कर, 29 अगस्त : छत्तीसगढ़ में केंद्रीय बिजली वितरण सुधार योजना के तहत घोटाला (Chhattisgarh Cable Scam Investigation) सामने आया है। यह 60 हजार करोड़ रुपये की योजना कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल 2022-23 में शुरू की गई थी। अकेले कोरबा जिले में 110 करोड़ रुपये का केबल घोटाला हुआ है। बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, मुंगेली और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिलों में भी गड़बड़ी की शिकायतें मिली हैं। विद्युत वितरण विभाग ने इन पांच जिलों में जांच के लिए 12 टीमें गठित की हैं और उन्हें 10 दिनों में रिपोर्ट पेश करनी है।
प्रारंभिक जांच में कोरबा और जांजगीर के दो कार्यपालन अभियंताओं को निलंबित किया गया है। केंद्रीय योजना में भ्रष्टाचार की आशंका के चलते रायपुर मुख्यालय से मुख्य अभियंता प्रोजेक्ट राजेंद्र प्रसाद का स्थानांतरण कर दिया गया। योजना के तहत लाइन लास कम करने के लिए खुले तारों की जगह केबल और प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य चल रहा है। कोरबा में 60 किलोमीटर में निम्न दाब के खुले तारों की जगह एरियल बंच केबल लगाई गई, लेकिन घटिया केबल के कारण (Chhattisgarh Cable Scam Investigation) 35 प्रतिशत राशि की बचत की गई। बिलासपुर और मुंगेली के स्टोर रूम में रखे केबल और कंडक्टर की जांच के लिए सैंपल लिए गए और स्टोर रूम सील कर दिए गए।
कोयला घोटाले में निलंबित आईएएस अधिकारी रानू साहू की संपत्ति की भी जांच होगी। पीडब्ल्यूडी की टीम गरियाबंद के तुलसी गांव स्थित उनके मकान, फार्म हाउस और दुकानों की जांच करेगी। ईओडब्ल्यू और एसीबी ने पीडब्ल्यूडी मुख्यालय से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। रानू साहू को 22 जुलाई 2023 को ईडी ने गिरफ्तार किया था, और सुप्रीम कोर्ट से 3 मार्च 2025 को उन्हें सशर्त जमानत मिली। इस मामले से संबंधित घोटाले की जांच (Chhattisgarh Cable Scam Investigation) और संपत्ति की विवेचना दोनों चल रही हैं।