सीजी भास्कर, 7 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ फिल्म नीति (Chhattisgarh Film Policy) के तहत प्रदेश की खूबसूरत लोकेशन और सब्सिडी के भरोसे फिल्म निर्माताओं को आकर्षित करने की कोशिश हुई, लेकिन सरकारी प्रक्रिया की सुस्ती अब इस पहल पर भारी पड़ती दिख रही है। फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक पिछले एक-दो वर्ष में 25 से ज्यादा फिल्म और वेब सीरीज प्रोजेक्ट छत्तीसगढ़ से दूसरे राज्यों में चले गए। कहीं सब्सिडी का भुगतान अटका तो कहीं शूटिंग की अनुमति मिलने में देरी हुई।
इसका सीधा असर प्रदेश की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा। फिल्म शूटिंग से कलाकारों और तकनीशियनों के साथ होटल, वाहन, कैटरिंग और छोटे कारोबारियों को रोजगार मिलता है। प्रोजेक्ट दूसरे राज्यों में जाने से यह पूरा आर्थिक लाभ भी प्रदेश से बाहर चला गया। मध्यप्रदेश समेत कुछ राज्यों में आसान अनुमति और तेज प्रक्रिया निर्माताओं को छत्तीसगढ़ की तुलना में ज्यादा आकर्षित कर रही है।
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करोड़ों की सब्सिडी का प्रविधान, भुगतान का इंतजार
फिल्म सब्सिडी (Chhattisgarh Film Policy) को लेकर नीति में बड़े बॉलीवुड और ओटीटी प्रोजेक्ट के लिए एक से दो करोड़ रुपये तक सहायता का प्रविधान है। स्थानीय फिल्मों के लिए बजट का 33 प्रतिशत, अधिकतम 15 लाख रुपये तक सहायता देने की व्यवस्था है।
फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि कागज पर नीति आकर्षक है, लेकिन भुगतान की प्रक्रिया लंबी होने से निर्माता परेशान हैं। प्रोजेक्ट पूरा करने के बाद सब्सिडी के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में निर्माता उन राज्यों का रुख कर रहे हैं, जहां प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान और भुगतान जल्द मिलने की उम्मीद रहती है।
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पहला सीजन छत्तीसगढ़ में, दूसरा मध्यप्रदेश में
प्रदेश से प्रोजेक्टों के बाहर जाने का एक उदाहरण वेब सीरीज ‘ग्राम चिकित्सालय’ है। इसका पहला सीजन छत्तीसगढ़ में शूट किया गया था, लेकिन दूसरे सीजन के लिए मध्यप्रदेश के बालाघाट और मंडला को चुना गया।
इसी तरह ‘मिशन रानीगंज’ की शूटिंग छत्तीसगढ़ में जेल की अनुमति नहीं मिलने के कारण नहीं हो सकी। अनुराग कश्यप की ‘बंदर’, जार फिल्म्स का प्रोजेक्ट और श्रेयस तलपड़े से जुड़ा प्रोजेक्ट भी छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित होने के बावजूद आगे नहीं बढ़ सका।
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नेतृत्व बदला, प्रक्रिया की रफ्तार भी प्रभावित
छत्तीसगढ़ फिल्म नीति (Chhattisgarh Film Policy) लागू होने के बाद संस्कृति विभाग में नेतृत्व और अधिकारियों के स्तर पर कई बदलाव हुए। वर्ष 2021 में कांग्रेस शासन के दौरान अमरजीत भगत के संस्कृति मंत्री रहते फिल्म नीति बनाई गई थी। इसके बाद विभाग की जिम्मेदारी बृजमोहन अग्रवाल और वर्तमान में राजेश अग्रवाल के पास रही।
फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि विभाग में लगातार हुए बदलावों से सब्सिडी से जुड़े प्रस्तावों की प्रक्रिया की गति प्रभावित हुई। हालांकि विभाग का कहना है कि नीति में बदलाव की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही व्यवस्था में सुधार होगा।
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दूसरे राज्यों में बढ़ा निर्माताओं का रुझान
छत्तीसगढ़ की फिल्म शूटिंग लोकेशन (Chhattisgarh Film Policy) को लेकर निर्माताओं की रुचि रही है। प्रदेश में ‘न्यूटन’, ‘मिसेज फलानी’ और ‘आरजे बस्तर’ जैसी फिल्मों की शूटिंग हुई है। वेब सीरीज में ‘ग्राम चिकित्सालय’, ‘जहानाबाद’, ‘द ग्रेट इंडियन मर्डर’ और ‘सिक्स सस्पेक्ट्स’ जैसे प्रोजेक्ट छत्तीसगढ़ की लोकेशन पर शूट किए गए हैं।
इसके बावजूद अनुमति और सब्सिडी से जुड़ी व्यावहारिक दिक्कतें निर्माताओं को दूसरे राज्यों की ओर मोड़ रही हैं। मध्यप्रदेश में बालाघाट, मंडला समेत अन्य लोकेशन पर छत्तीसगढ़ से बाहर गए प्रोजेक्ट शूट किए जा रहे हैं।
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डेढ़ महीने में पूरी होगी बदलाव की प्रक्रिया
छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन ने कहा कि राजपत्र में कुछ बदलाव किए जा रहे हैं। इस प्रक्रिया में करीब एक से डेढ़ महीने का समय लग रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले डेढ़ महीने में बदलाव की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और लोगों को सब्सिडी की सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी।
सरकार की ओर से प्रक्रिया आसान होने और सब्सिडी का लाभ मिलने के बाद प्रदेश में फिल्म निर्माण को फिर गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
फैक्ट फाइल
2021 में छत्तीसगढ़ फिल्म नीति लागू
25 से अधिक फिल्म और वेब सीरीज प्रोजेक्ट दूसरे राज्यों में गए
बड़े प्रोजेक्टों के लिए 1 से 2 करोड़ रुपये तक सब्सिडी का प्रविधान
स्थानीय फिल्मों के लिए 33 प्रतिशत, अधिकतम 15 लाख रुपये तक सहायता
मध्यप्रदेश में कई प्रोजेक्टों ने बदला शूटिंग ठिकाना
छत्तीसगढ़ में शूट हुईं फिल्में : न्यूटन, मिसेज फलानी, आरजे बस्तर
वेब सीरीज : ग्राम चिकित्सालय, जहानाबाद, द ग्रेट इंडियन मर्डर, सिक्स सस्पेक्ट्स




