सीजी भास्कर, 28 जून। छत्तीसगढ़ में हाल ही में बलौदाबाजार जिले के एक सीरियल किलिंग मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। आरोपी पर तीन महीनों के भीतर आठ लोगों की जहरीली शराब पिलाकर हत्या करने का आरोप है। पुलिस पूछताछ में पुरानी रंजिश, कर्ज और बदले की भावना को हत्या की वजह बताया गया। हालांकि यह राज्य का पहला मामला नहीं है। पिछले दो दशकों में प्रदेश में कई ऐसे सीरियल किलिंग केस सामने आए हैं, जिनमें आरोपियों ने लालच, संपत्ति, सनक, यौन विकृति और बदले की भावना में कई लोगों की जान ले ली। (Chhattisgarh Serial Killers)
रायपुर निवासी अरुण चंद्राकर ने वर्ष 2005 से 2012 के बीच अपने पिता, पत्नी, साली, मकान मालिक और अन्य करीबी लोगों सहित सात लोगों की हत्या कर दी थी। पुलिस जांच में सामने आया कि वह कई पीड़ितों को पहले बेहोश करता और फिर जिंदा गड्ढे में दफना देता था। उसकी करतूतों का खुलासा एक बच्ची की गुमशुदगी की जांच के दौरान हुआ, जिसके बाद कई कंकाल बरामद किए गए।
प्रदेश के चर्चित मामलों (Chhattisgarh Serial Killers) में उदयन दास का नाम भी शामिल है। उसने अपने माता-पिता की हत्या कर उनके शव घर के सेप्टिक टैंक में दफना दिए। बाद में भोपाल में अपनी लिव-इन पार्टनर की हत्या कर शव को लोहे के बक्से में सीमेंट से भरकर कमरे में ही छिपा दिया। वर्षों तक वह उसी कमरे में सामान्य जीवन जीता रहा। पुलिस जांच में उसके कई झूठे दावों और दोहरे जीवन का भी खुलासा हुआ।
धमतरी जिले का जितेंद्र ध्रुव भी प्रदेश के कुख्यात सीरियल किलर्स में गिना जाता है। उसने चोरी और महिलाओं से दुष्कर्म की नीयत से घरों में घुसकर विरोध करने वालों की हत्या की। जांच के दौरान उसने एक पुराने ब्लाइंड मर्डर का भी खुलासा किया, जिसमें पहले किसी अन्य व्यक्ति को आरोपी बनाया गया था।
दुर्ग जिले के सुखवंत साहू ने खुद को तांत्रिक बताकर लोगों से पैसे ऐंठे और रकम वापस मांगने वालों की हत्या कर दी। पुलिस के अनुसार उसने गंगाजल में साइनाइड मिलाकर दो लोगों की जान ली और बाद में राज खुलने के डर से अपने साथी की भी हत्या कर दी। पूछताछ में उसने हत्या का तरीका एक टीवी क्राइम शो से सीखने की बात स्वीकार की।
बलौदाबाजार जिले के तेजराम पटेल ने स्वयं को गूंगा-बहरा बताकर वर्षों तक पुलिस को गुमराह किया। जांच में सामने आया कि उसने दो महिलाओं की हत्या की थी और एक अन्य महिला को भी निशाना बनाने की योजना बना चुका था। पुलिस ने विशेष पूछताछ और तकनीकी जांच के बाद उसके झूठ का पर्दाफाश किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अपराधी (Chhattisgarh Serial Killers) सामान्य लोगों की तरह समाज में रहते हैं, जिससे उनकी पहचान करना बेहद कठिन होता है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार सीरियल किलिंग मामलों में सबसे बड़ी चुनौती ठोस सबूत जुटाना और अलग-अलग घटनाओं के बीच संबंध स्थापित करना होता है।



