सीजी भास्कर, 24 अगस्त। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम ने मतदाता सूची (SIR Controversy) के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि मौजूदा आंकड़ों के आधार पर प्रक्रिया पूरी होने के बाद बड़ी संख्या में नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।
चिदंबरम ने आशंका जताई कि देश की करीब 10 प्रतिशत वयस्क आबादी, यानी लगभग 10 करोड़ लोगों के पास मतदान का अधिकार नहीं रह सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि इससे नागरिकों की ऐसी नई श्रेणी बन सकती है, जो देश के नागरिक तो होंगे, लेकिन चुनाव में वोट नहीं डाल सकेंगे।

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SIR Controversy पर चिदंबरम ने जताई चिंता
पी. चिदंबरम ने एसआईआर प्रक्रिया के संभावित परिणामों को लेकर चिंता जाहिर की। उनका कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने दावा किया कि वर्तमान आंकड़ों के हिसाब से करीब 10 प्रतिशत वयस्क आबादी मतदान से बाहर हो सकती है। हालांकि यह चिदंबरम का राजनीतिक आकलन और दावा है।
पूर्व राजदूत नवदीप सूरी के मामले का दिया हवाला
चिदंबरम की टिप्पणी पूर्व राजदूत नवदीप सूरी की ओर से पंजाब में चल रही एसआईआर प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों के बाद सामने आई है।
सूरी भारत के मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात में राजदूत तथा ऑस्ट्रेलिया में भारत के पूर्व उच्चायुक्त रह चुके हैं। उन्होंने सत्यापन प्रक्रिया के दौरान मतदाता रिकॉर्ड के मिलान को लेकर अपनी परेशानी सार्वजनिक की थी।
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2003 की मतदाता सूची में नहीं मिला विवरण
नवदीप सूरी के अनुसार, सत्यापन के लिए इस्तेमाल की जा रही वर्ष 2003 की मतदाता सूची में उनके विवरण का मिलान नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि उस समय वह लंदन में तैनात थे।
उनका कहना है कि विदेश में पदस्थ होने के कारण वह उस समय मतदाता सूची से जुड़ी संबंधित संशोधन प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सके थे। इसके चलते अब उनके रिकॉर्ड के सत्यापन को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
आम मतदाताओं की स्थिति पर उठाया सवाल
पूर्व राजदूत के मामले का हवाला देते हुए चिदंबरम ने कहा कि जब एक पूर्व राजनयिक को मतदाता रिकॉर्ड और सत्यापन से जुड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, तो आम नागरिकों के सामने इससे बड़ी दिक्कतें आ सकती हैं।
उन्होंने चुनाव आयोग से एसआईआर की प्रक्रिया और उसके संभावित प्रभावों को लेकर स्पष्टता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है। आने वाले दिनों में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
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