सीजी भास्कर, 26 मई : छत्तीसगढ़ सरकार ने सड़क जैसी परिस्थितियों में जीवन गुजार रहे बच्चों को सुरक्षित बचपन (Child Rescue Campaign) और सम्मानजनक भविष्य देने की दिशा में बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है। Women and Child Development Department Chhattisgarh की ओर से “बाल सक्षम नीति 2022” के तहत 1 जून से 30 जून 2026 तक पूरे प्रदेश में विशेष सघन अभियान चलाया जाएगा।
इस अभियान (Child Rescue Campaign) के तहत सड़क पर रहने वाले, भीख मांगने, बाल श्रम करने और कचरा बीनने जैसे कार्यों में लगे बच्चों की पहचान कर उनका रेस्क्यू, पुनर्वास और शिक्षा से जोड़ने की व्यापक कार्रवाई की जाएगी। सरकार का लक्ष्य ऐसे बच्चों को सुरक्षित वातावरण, स्वास्थ्य सुविधा, आश्रय और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराकर मुख्यधारा में वापस लाना है।
“हर बच्चे को मिलेगा सुरक्षित बचपन”
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार यह अभियान केवल बच्चों की पहचान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन्हें स्थायी पुनर्वास उपलब्ध कराने पर भी विशेष फोकस रहेगा। राज्य शासन ने ऐसे बच्चों को किशोर न्याय अधिनियम 2015 और संशोधित नियम 2022 के तहत “देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बालक” की श्रेणी में शामिल किया है।
अभियान (Child Rescue Campaign) के लिए जिला कलेक्टरों के नेतृत्व में विशेष रेस्क्यू टीमें गठित की जाएंगी। वार्ड और संकुल स्तर पर विभिन्न विभागों के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी ताकि कोई भी जरूरतमंद बच्चा अभियान से छूट न जाए।
हॉटस्पॉट इलाकों में चलेगा विशेष अभियान
सरकार ने सड़क जैसी परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों के चिन्हित हॉटस्पॉट क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। रेस्क्यू किए गए बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जहां उनकी परिस्थितियों के अनुसार संस्थागत देखभाल, परिवार के साथ पुनर्स्थापन या अन्य पुनर्वास संबंधी निर्णय लिए जाएंगे।
प्रत्येक बच्चे की सामाजिक जांच रिपोर्ट और व्यक्तिगत बाल देखरेख योजना तैयार की जाएगी। इसके जरिए बच्चों को स्कूल, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाएगा।
परिवारों को भी मिलेगी आर्थिक मदद
राज्य शासन ने यह भी तय किया है कि बच्चों के परिवारों को विभिन्न शासकीय योजनाओं और आर्थिक सहायता से जोड़ा जाएगा, ताकि आर्थिक मजबूरी के कारण बच्चे दोबारा सड़क जैसी परिस्थितियों में न पहुंचें।
पुनर्वास कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा की जाएगी। अभियान में जिला प्रशासन, पुलिस, श्रम विभाग, रेलवे, समाज कल्याण विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, चाइल्ड लाइन और स्वयंसेवी संस्थाओं का समन्वित सहयोग लिया जाएगा।
सालभर जारी रहेगी निगरानी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक माह का अभियान नहीं, बल्कि लगातार चलने वाली प्रक्रिया होगी। मिशन वात्सल्य के अंतर्गत बाल स्वराज पोर्टल पर बच्चों की जानकारी अपडेट की जाएगी और पूरे वर्ष पुनर्वास की कार्रवाई जारी रखी जाएगी।
छत्तीसगढ़ सरकार 1 जून से 30 जून तक सड़क जैसी परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों के लिए विशेष अभियान चलाएगी। अभियान के तहत बाल श्रम, भीख और कचरा बीनने में लगे बच्चों का रेस्क्यू कर उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्वास से जोड़ा जाएगा। सरकार ने इसे सुरक्षित बचपन और सम्मानजनक भविष्य की दिशा में बड़ा कदम बताया है।



