सीजी भास्कर, 06 जुलाई : विकसित छत्तीसगढ़ (Developed Chhattisgarh) के निर्माण, सुशासन को और अधिक प्रभावी बनाने तथा भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप प्रशासनिक क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित चिंतन शिविर 3.0 (Chintan Shivir 3.0) का दो दिवसीय आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस शिविर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मंत्रिपरिषद के सदस्य, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तथा देश के प्रतिष्ठित नीति विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और विषय विशेषज्ञों ने शासन, विकास और जनसेवा से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्यापक मंथन किया।
- मुख्यमंत्री बोले- विचार अब बन रहे सुशासन की आधारशिला
- पिछले चिंतन शिविरों के सुझावों से हुए बड़े बदलाव
- पर्यटन बनेगा सतत समृद्धि का प्रमुख इंजन
- जिला आधारित विकास मॉडल पर दिया गया जोर
- तकनीक आधारित सुशासन पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
- कृषि समृद्धि के लिए प्राकृतिक खेती और तकनीक पर जोर
- नेतृत्व विकास और जनसेवा पर भी हुआ मंथन
- विकसित भारत 2047 के संकल्प को मिलेगी मजबूती
मुख्यमंत्री बोले- विचार अब बन रहे सुशासन की आधारशिला
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि चिंतन शिविर 3.0 (Chintan Shivir 3.0) अब केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं रह गया है, बल्कि शासन व्यवस्था में ठोस सुधारों का प्रभावी माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-संचालित और नागरिकों की आकांक्षाओं के अनुरूप प्रशासन विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। शिविर से प्राप्त सुझावों को शीघ्र ही नीतिगत और प्रशासनिक सुधारों के रूप में लागू किया जाएगा, जिससे विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति मिलेगी।
पिछले चिंतन शिविरों के सुझावों से हुए बड़े बदलाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले आयोजित चिंतन शिविरों से मिले सुझावों को सरकार ने प्रभावी ढंग से लागू किया है। मंत्रालय में ई-ऑफिस (e-Office) प्रणाली लागू होने से फाइलों के निपटारे में पारदर्शिता और गति आई है। वहीं सीएम हेल्पलाइन 1076 (CM Helpline 1076) के माध्यम से नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान की व्यवस्था मजबूत हुई है। इसके अलावा सेवा सेतु (Seva Setu) पोर्टल के जरिए 36 विभागों की 520 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराकर नागरिक सेवाओं को अधिक सरल और पारदर्शी बनाया गया है।
पर्यटन बनेगा सतत समृद्धि का प्रमुख इंजन
‘सतत समृद्धि के इंजन के रूप में पर्यटन’ विषय पर आयोजित सत्र में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं पर्यटन नीति विशेषज्ञ सुमन बिल्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक, जनजातीय और सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में देश का अग्रणी हाई-वैल्यू, लो-इम्पैक्ट टूरिज्म (High Value Low Impact Tourism) गंतव्य बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने पर्यटन अवसंरचना, सामुदायिक भागीदारी, निवेश और उत्तरदायी पर्यटन मॉडल को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
जिला आधारित विकास मॉडल पर दिया गया जोर
‘सबका प्रयास के माध्यम से विकासपरक राजनीति’ विषय पर लोकसभा सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा कि प्रत्येक जिले को विकास का वास्तविक केंद्र बनाया जाना चाहिए। उन्होंने डिस्ट्रिक्ट जीडीपी (District GDP) आधारित विकास योजना, स्थानीय आर्थिक क्षमता के अनुरूप रणनीति, रोजगार, उद्यमिता, कृषि परिवर्तन और सहभागी शासन के मॉडल पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जिला-केंद्रित विकास मॉडल टियर-2 और टियर-3 क्षेत्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
तकनीक आधारित सुशासन पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
समापन सत्र में डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने प्रभावी नीति-निर्माण, नेतृत्व विकास और सुशासन पर अपने विचार साझा किए। वहीं नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5G, ड्रोन, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, ब्लॉकचेन और डेटा आधारित प्रशासन की संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उभरती प्रौद्योगिकियां शासन को अधिक दक्ष, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
कृषि समृद्धि के लिए प्राकृतिक खेती और तकनीक पर जोर
‘कृषि से समृद्धि’ विषयक सत्र में कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद और कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु-अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन, आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार संपर्क पर आधारित कृषि मॉडल प्रस्तुत किए। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई व्यावहारिक सुझाव दिए।
नेतृत्व विकास और जनसेवा पर भी हुआ मंथन
शिविर के उद्घाटन सत्र में प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व, भावनात्मक संतुलन, नैतिक उत्तरदायित्व और जनसेवा के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि संवेदनशील और मूल्य-आधारित नेतृत्व ही प्रभावी एवं जनोन्मुखी सुशासन की आधारशिला है।
विकसित भारत 2047 के संकल्प को मिलेगी मजबूती
दो दिवसीय चिंतन शिविर 3.0 (Chintan Shivir 3.0) में सुशासन, नेतृत्व विकास, उभरती प्रौद्योगिकियां, कृषि, पर्यटन और विकासपरक राजनीति जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि विशेषज्ञों, मंत्रिपरिषद और प्रशासनिक नेतृत्व से प्राप्त सुझाव आने वाले समय में राज्य की नीतियों, प्रशासनिक सुधारों और विकास कार्यक्रमों का आधार बनेंगे। विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में यह शिविर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।



