रिपोर्टर – आशुतोष सिंह राजपूत
सीजी भास्कर, 24 जून। उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर चल (Chital Hunting) रही निगरानी के बीच एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। गोपनीय सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम हरकत में आई और जांच का दायरा बढ़ाया गया। शुरुआती जानकारी ने अधिकारियों को सतर्क कर दिया था, जिसके बाद कई टीमों को मौके पर लगाया गया।
जांच आगे बढ़ी तो एक ऐसे मामले का खुलासा हुआ जिसने वन्यजीव संरक्षण को लेकर फिर चिंता बढ़ा दी। तलाशी के दौरान मिले सबूतों ने शिकार की आशंका को मजबूत किया और कार्रवाई सीधे आरोपियों तक पहुंच गई।
गोपनीय सूचना के बाद शुरू हुई कार्रवाई Chital Hunting
उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व प्रबंधन को 21 जून को सूचना मिली थी कि उदंती कोर क्षेत्र के ग्राम अमाड़ में किसी वन्यप्राणी का शिकार किया गया है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए एंटी पोचिंग टीम, डॉग स्क्वाड और वन परिक्षेत्र उत्तर उदंती मैनपुर के कर्मचारियों ने संयुक्त अभियान चलाया। टीम ने संदिग्धों के घरों में दबिश देकर तलाशी शुरू की, जहां कई अहम साक्ष्य हाथ लगे।
घर से बरामद हुआ चीतल का मांस
तलाशी के दौरान आरोपियों के घर से चीतल के मांस की सब्जी, खून से सने तीर, धनुष, खरगोश फंदा, मोर पंख, बाज पंख और अन्य शिकार सामग्री बरामद की गई। बरामद सामान के आधार पर वन विभाग ने मामले की जांच को और आगे बढ़ाया। पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं।
पूछताछ में कबूला शिकार
वन विभाग के अनुसार पूछताछ के दौरान आरोपी नरेश कुमार भंजिया ने 17 जून को तारिणी घाट क्षेत्र में तीर धनुष से चीतल का शिकार करना स्वीकार (Chital Hunting) किया। मामले में नरेश कुमार भंजिया और बालाराम सोरी को गिरफ्तार किया गया है। दोनों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज
वन विभाग ने आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। विभाग ने मामले में बरामद चीतल के मांस के नमूने भी सुरक्षित किए हैं ताकि वैज्ञानिक जांच के माध्यम से तथ्यों की पुष्टि की जा सके।
फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए नमूने
बरामद मांस के नमूनों को परीक्षण के लिए जबलपुर स्थित स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ फोरेंसिक एंड हेल्थ भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद जांच को और मजबूती (Chital Hunting) मिलेगी। इस कार्रवाई में एंटी पोचिंग टीम के नोडल अधिकारी एवं सहायक संचालक गोपाल कश्यप, परिक्षेत्र अधिकारी सुष्मी ज्योति ध्रुव, डॉग स्क्वाड तथा वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।





