सीजी भास्कर, 03 सितंबर। जिले के चितापुर ग्रामीण क्षेत्र में एक टूटी पुलिया बच्चों की पढ़ाई के रास्ते में बड़ी बाधा (Chitapur Broken Bridge) बन गई है। करीब एक साल से स्कूल जाने वाले बच्चों और ग्रामीणों को बांस की चटाई के सहारे बनाए गए अस्थायी रास्ते से आवागमन करना पड़ रहा है। पुलिया क्षतिग्रस्त होने के बावजूद अब तक इसकी स्थायी मरम्मत नहीं कराई जा सकी है।
बारिश के मौसम में हालात और भी मुश्किल हो जाते हैं। बच्चों को रोजाना जोखिम उठाकर इस अस्थायी रास्ते से गुजरते हुए स्कूल पहुंचना पड़ रहा है।

एक साल से जुगाड़ के सहारे आवागमन Chitapur Broken Bridge
स्थानीय लोगों के अनुसार, पुलिया करीब एक साल से क्षतिग्रस्त है। इसके बाद से ग्रामीणों ने आवागमन के लिए बांस की चटाई और अन्य स्थानीय संसाधनों की मदद से अस्थायी रास्ता तैयार किया है।
हालांकि यह व्यवस्था सुरक्षित नहीं है, लेकिन मजबूरी में बच्चों सहित ग्रामीणों को इसी रास्ते का उपयोग करना पड़ रहा है।
बारिश में बढ़ जाती है बच्चों की परेशानी
बारिश के दौरान टूटे पुलिया वाले क्षेत्र में पानी का बहाव बढ़ने से स्थिति और गंभीर हो जाती है। ऐसे समय में स्कूल जाने वाले बच्चों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित तरीके से रास्ता पार करने की होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि खराब मौसम में बच्चों के स्कूल आने-जाने को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती है।
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अधिकारियों से शिकायत के बाद भी नहीं हुआ समाधान
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि टूटी पुलिया की मरम्मत के लिए कई बार जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराया गया है।
इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई या स्थायी समाधान सामने नहीं आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से समस्या बनी रहने के बावजूद जिम्मेदार विभाग द्वारा पुलिया की मरम्मत को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई गई।
बच्चों की शिक्षा के रास्ते में बुनियादी सुविधा की कमी
एक ओर सरकार और प्रशासन बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर चितापुर क्षेत्र के बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए सुरक्षित रास्ते जैसी बुनियादी सुविधा भी नहीं मिल पा रही है।
रोजाना जोखिम भरे रास्ते से गुजरने की मजबूरी बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ उनकी नियमित पढ़ाई पर भी असर डाल सकती है।
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ग्रामीणों ने की पुलिया की जल्द मरम्मत की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से टूटी पुलिया की जल्द से जल्द स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है।
उनका कहना है कि बच्चों के लिए सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था प्राथमिकता के आधार पर की जानी चाहिए, ताकि उन्हें जुगाड़ के सहारे और जोखिम उठाकर स्कूल न जाना पड़े।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर बच्चों की पढ़ाई का रास्ता कब तक सरकारी इंतजार और बांस की चटाई के जुगाड़ के सहारे चलता रहेगा?
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रिपोर्टर : रिजवान मेमन




