सीजी भास्कर, 29 जून। राजधानी में घर-घर कचरा पृथक्करण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नगर निगम 15वें वित्त आयोग की राशि से 1.60 लाख डस्टबिन का वितरण करने जा रहा है। इसके लिए लगभग 3.77 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। निगम ने 12 लीटर क्षमता वाले प्रत्येक डस्टबिन की खरीद 235.80 रुपए प्रति नग की दर से की है। हालांकि, बाजार में इसी क्षमता के डस्टबिन की कीमत इससे काफी कम होने का दावा सामने आने के बाद खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। (Raipur dustbin purchase controversy)
जानकारी के अनुसार नगर निगम ने जेम पोर्टल के माध्यम से निविदा जारी की थी, जिसमें 17 फर्मों ने भाग लिया। तकनीकी परीक्षण के बाद चार फर्मों को पात्र घोषित किया गया और उन्हें डस्टबिन की आपूर्ति का कार्यादेश जारी किया गया। निर्मला हाउसवेयर को 56 हजार, सारथी इंटरप्राइजेस को 49,600, सनशाइन इंडस्ट्रीज को 27,200 तथा गोदड़ीवाला प्लास्टिक प्राइवेट लिमिटेड को 27,200 डस्टबिन की आपूर्ति का जिम्मा दिया गया।
स्थानीय बाजार में की गई पड़ताल में कई व्यापारियों ने दावा किया कि समान क्षमता का डस्टबिन खुदरा बाजार में 190 से 200 रुपए के बीच उपलब्ध है। (Raipur dustbin purchase controversy) व्यापारियों का यह भी कहना है कि बड़ी मात्रा में खरीद किए जाने पर इसकी कीमत और कम हो सकती है। ऐसे में थोक खरीद की कीमत खुदरा बाजार से अधिक होने पर सवाल उठ रहे हैं।
बंजारी रोड स्थित एक व्यापारी ने बताया कि संबंधित कंपनी का 12 लीटर क्षमता वाला डस्टबिन खुदरा बाजार में लगभग 190 रुपए में उपलब्ध है, जबकि थोक खरीद पर इसकी कीमत 150 से 160 रुपए तक हो सकती है। वहीं, एक अन्य दुकान से इसी क्षमता का डस्टबिन 200 रुपए में खरीदा गया। दुकानदार का कहना था कि अधिक मात्रा में ऑर्डर मिलने पर प्रति डस्टबिन 20 से 30 रुपए तक की और कमी संभव है।
नगर निगम के अनुसार सभी 1.60 लाख डस्टबिन केवल बस्ती क्षेत्रों के घरों में वितरित किए जाएंगे। प्रत्येक वार्ड को वहां की बस्तियों की संख्या के आधार पर लगभग 2,000 से 2,500 डस्टबिन आवंटित किए गए हैं। डस्टबिन संबंधित वार्ड पार्षदों को उपलब्ध करा दिए गए हैं और जल्द ही उनका वितरण शुरू किया जाएगा।
डस्टबिन की खरीद दर और बाजार मूल्य में अंतर को लेकर अब खरीद प्रक्रिया (Raipur dustbin purchase controversy) की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, निगम की ओर से इस मूल्य अंतर पर अभी कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।



