सीजी भास्कर, 10 मई : छत्तीसगढ़ के चर्चित कोयला घोटाले (Coal Scam Case) में हाई कोर्ट ने कारोबारी सूर्यकांत तिवारी के ड्राइवर नारायण साहू की जमानत याचिका खारिज कर दी है। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि नारायण साहू केवल ड्राइवर नहीं था, बल्कि कथित अवैध वसूली नेटवर्क का सक्रिय सदस्य था। जांच में यह भी सामने आया है कि सूर्यकांत तिवारी ने उसके नाम पर संपत्तियां खरीदी थीं।
जांच एजेंसी EOW के अनुसार, आरोपी पिछले करीब ढाई वर्षों से फरार था और कोयला लेवी से जुड़ी रकम के कलेक्शन व ट्रांसफर में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। एजेंसी ने उसे दो महीने पहले गिरफ्तार किया था। बताया गया है कि कथित अवैध वसूली से जुड़े लेन-देन का संचालन सूर्यकांत तिवारी अपने भरोसेमंद ड्राइवर नारायण साहू के माध्यम से कराता था।
EOW की कार्रवाई के बाद गिरफ्तार किए गए नारायण साहू को जेल भेज दिया गया था। इसके बाद उसने पहले ईओडब्ल्यू की विशेष अदालत में जमानत अर्जी दाखिल की, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली। विशेष अदालत द्वारा आवेदन खारिज किए जाने के बाद आरोपी ने हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी।
याचिका में उसने दावा किया कि वह सिर्फ कारोबारी का ड्राइवर था और कथित Coal Scam Case से उसका कोई लेना-देना नहीं है। आरोपी ने यह भी कहा कि जांच एजेंसियों ने उस पर बयान देने का दबाव बनाया और बाद में उसे झूठे तरीके से मामले में फंसा दिया।
राज्य सरकार ने किया जमानत का विरोध
राज्य शासन की ओर से पेश अधिवक्ता ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कोर्ट को बताया कि जांच में करोड़ों रुपए की अवैध वसूली से जुड़े दस्तावेज और लेन-देन के प्रमाण मिले हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, नारायण साहू कथित कोल लेवी सिंडिकेट के जरिए लगभग 13 करोड़ रुपए की नकद अवैध वसूली में शामिल था।
सरकार की ओर से कोर्ट को यह भी बताया गया कि आरोपी लंबे समय तक फरार रहा, पूछताछ से बचता रहा और जांच में सहयोग नहीं कर रहा था। मामले में उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) भी जारी किया गया था।
हाई कोर्ट ने कहा- आरोपी के खिलाफ ठोस सबूत
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने माना कि जांच एजेंसियों के पास आरोपी के खिलाफ पर्याप्त और गंभीर सबूत मौजूद हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि नारायण साहू सूर्यकांत तिवारी का बेहद करीबी और भरोसेमंद व्यक्ति था, जो कथित अवैध वसूली नेटवर्क में अहम भूमिका निभा रहा था। जांच के दौरान जब्त की गई हैंडरिटन डायरी में भी नारायण साहू के नाम से कई एंट्रियां मिलने का दावा किया गया है, जिसे कोर्ट ने गंभीर माना।
क्या है Coal Scam Case
प्रवर्तन निदेशालय (ED) का दावा है कि छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन और परमिट प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अवैध वसूली की गई। इस मामले में 36 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। जांच एजेंसी के मुताबिक, ऑनलाइन परमिट को ऑफलाइन कर कोयला कारोबारियों से करोड़ों रुपए की उगाही की गई।
ED के अनुसार, कथित Coal Scam Case में करीब 570 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध वसूली हुई है। जांच में यह भी सामने आया कि खनिज विभाग के तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध रही। बताया गया है कि 15 जुलाई 2020 को तत्कालीन संचालक समीर विश्नोई द्वारा ऑनलाइन परमिट व्यवस्था में बदलाव से जुड़े आदेश जारी किए गए थे।
दो पूर्व मंत्रियों समेत 36 लोगों पर FIR
ED की रिपोर्ट के आधार पर ACB और EOW ने दो पूर्व मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों समेत 36 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है। मामले में जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। इस केस में IAS रानू साहू, IAS समीर विश्नोई, सौम्या चौरसिया, जेडी माइनिंग एसएस नाग और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी समेत कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
सूर्यकांत तिवारी की क्या बताई गई भूमिका
ED की जांच के मुताबिक, कारोबारी सूर्यकांत तिवारी को कथित कोल लेवी नेटवर्क का मास्टरमाइंड माना गया है। आरोप है कि कोयला परिवहन और परमिट प्रक्रिया में अनियमितताओं के जरिए प्रति टन 25 रुपए की अवैध वसूली की जाती थी। जांच एजेंसी का दावा है कि यह रकम कर्मचारियों और करीबी लोगों के माध्यम से एकत्र की जाती थी और बदले में संबंधित कारोबारियों को खनिज विभाग से परमिट उपलब्ध कराए जाते थे।


