सीजी भास्कर, 19 जून : बस्तर के युवाओं और विशेष रूप से जनजातीय बेटियों (Commercial Pilot Training Bastar) के लिए एक ऐतिहासिक अवसर सामने आया है। अब बस्तर की पहचान केवल जंगल, पहाड़ और प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यहां के युवा देश के आसमान में विमान उड़ाते भी नजर आएंगे। शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय और स्वावलंबी भारत अभियान की पहल पर देश की अग्रणी एयरलाइन इंडिगो ने बस्तर के युवाओं के लिए अपना विशेष कार्यक्रम “Giving Wings to Fly” शुरू करने पर सहमति दी है। इस पहल के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली युवाओं के लिए कमर्शियल पायलट बनने का सपना साकार होने जा रहा है।
सपनों को मिलेगी नई उड़ान, इंडिगो उठाएगी पूरा खर्च
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि चयनित अभ्यर्थियों को कमर्शियल पायलट बनने तक की पूरी ट्रेनिंग और आवश्यक शैक्षणिक खर्च इंडिगो एयरलाइंस द्वारा वहन किया जाएगा। आमतौर पर पायलट प्रशिक्षण पर लाखों रुपये खर्च होते हैं, जिसके कारण ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवा इस क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ पाते। अब यह बाधा दूर होने जा रही है।
कौन कर सकेगा आवेदन?
योजना के तहत 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के ऐसे युवा आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने 12वीं कक्षा में Physics, Mathematics और English विषयों के साथ पढ़ाई की हो। पासपोर्ट होना आवश्यक शर्तों में शामिल है, हालांकि जिन अभ्यर्थियों के पास पासपोर्ट नहीं है, वे भी आवेदन कर सकते हैं और चयन प्रक्रिया के दौरान आवश्यक दस्तावेज पूरे कर सकते हैं। अंतिम चयन इंडिगो की प्रवेश परीक्षा, मेडिकल फिटनेस और निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाएगा।
बस्तर के कॉलेजों में शुरू होगी प्रतिभाओं की तलाश
शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय ने बस्तर संभाग के सभी महाविद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देश जारी कर पात्र छात्र-छात्राओं तक इस अवसर की जानकारी पहुंचाने को कहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक योग्य युवा आवेदन करें और एविएशन सेक्टर में अपना भविष्य बना सकें।
जनजातीय बेटियों के लिए बनेगा नया इतिहास
प्रारंभिक चरण में दो से तीन विद्यार्थियों के चयन की संभावना जताई जा रही है, लेकिन प्रदर्शन बेहतर रहने पर भविष्य में सीटों की संख्या बढ़ सकती है। यह पहल विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों की बेटियों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है, जिन्हें अब देश के सबसे प्रतिष्ठित करियर विकल्पों में जगह बनाने का मौका मिलेगा।
बदलते बस्तर की नई पहचान
यह योजना केवल रोजगार उपलब्ध कराने की पहल नहीं है, बल्कि बस्तर को राष्ट्रीय एविएशन सेक्टर से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है। जिस बस्तर को कभी नक्सलवाद और पिछड़ेपन की चुनौतियों के कारण जाना जाता था, वहीं अब के युवा विमान के कॉकपिट तक पहुंचने का सपना साकार कर सकेंगे।
यदि यह पहल सफल होती है तो आने वाले वर्षों में बस्तर की बेटियां और युवा न केवल विमान उड़ाएंगे, बल्कि पूरे क्षेत्र की नई पहचान भी बनेंगे। यह बदलाव का वह अध्याय है, जहां अब आर्थिक मजबूरियां सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बनेंगी।





