सीजी भास्कर, 27 सितंबर : पितृ पक्ष के पहले दिन सुबह से ही घाटों पर श्रद्धालुओं (Pitru Paksha 2026) की भीड़ उमड़ पड़ी। बड़ी संख्या में लोगों ने अपने पूर्वजों की स्मृति में नदी तट पर पहुंचकर तर्पण और पिंडदान किया। धार्मिक विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। रामानुजगंज और आसपास के ग्रामीण इलाकों से लोग कन्हर नदी के तट पर पहुंचे। मां महामाया मंदिर छठ घाट और प्राचीन शिव मंदिर घाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। कन्हर नदी को उत्तरवाहिनी नदी माना जाता है। इसी धार्मिक मान्यता के चलते पितृ पक्ष के दौरान यहां तर्पण और पिंडदान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
यह भी पढ़ें : Girlfriend Meeting Crime : गर्लफ्रेंड से मिलने आया युवक बना चोर, पैसे खत्म हुए तो 5 बाइक-स्कूटी चुराईं
तर्पण कर पूर्वजों को किया याद
पितृ पक्ष (Pitru Paksha 2026) में पूर्वजों की स्मृति में तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। श्रद्धालुओं ने नदी तट पर पूजा-अर्चना की और अपने पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दौरान तर्पण और दान को पूर्वजों के प्रति सम्मान और कर्तव्य से जोड़कर देखा जाता है। श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा और दान किया।
यह भी पढ़ें : Durg Minor Rape Case : साढ़े 4 साल की मासूम से रेप, गला घोंटकर बोरे में फेंका; 153 दिन में आरोपी को उम्रकैद
पुजारी ने की अपील
मां महामाया मंदिर के पुजारी जितेंद्र पांडे ने पितृ पक्ष के धार्मिक महत्व की जानकारी दी। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपनी सामर्थ्य के अनुसार पितरों का तर्पण, पूजन और दान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पितृ पक्ष में श्रद्धा के साथ किए जाने वाले तर्पण और दान की धार्मिक परंपरा रही है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों को स्मरण करते हुए धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
यह भी पढ़ें : रायपुर के अस्पताल में गार्ड पर मरीजों की ड्रिप संभालने का आरोप, वीडियो वायरल; डॉक्टर ने बताया गलत
घाटों पर व्यवस्था
श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए नगर पालिका की ओर से दोनों घाटों पर साफ-सफाई और जरूरी व्यवस्थाएं की गई हैं। घाटों पर बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने को देखते हुए व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए। पितृ पक्ष के पहले दिन दोनों घाटों पर सुबह से श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। लोगों ने धार्मिक विधि-विधान के साथ तर्पण और पिंडदान कर अपने पूर्वजों को याद किया।
यह भी पढ़ें : Marriage Promise Exploitation Case : शादी का झांसा देकर शोषण का आरोप, 2 बार गर्भपात के बाद दूसरी से की सगाई



