रायपुर, 13 अगस्त। छत्तीसगढ़ में आवारा मवेशियों की समस्या अब गांवों से निकलकर सरकारी दफ्तरों तक पहुंचने (Stray Cattle) लगी है। सरगुजा में ग्रामीणों का ऐसा विरोध देखने को मिला कि वे सड़क और गांव में घूम रहे मवेशियों को पकड़कर सीधे कलेक्ट्रेट पहुंच गए। वहीं कोरबा के कटघोरा क्षेत्र में किसान अपनी फसलों और सड़क हादसों के बढ़ते खतरे को लेकर नगर पालिका और एसडीएम कार्यालय पहुंचे।
ग्रामीणों के इस तरीके से प्रशासन के सामने भी समस्या की गंभीरता साफ नजर आई। सरगुजा में कलेक्ट्रेट परिसर के मुख्य द्वार पर बड़ी संख्या में मवेशियों को देखकर अधिकारी और कर्मचारी भी कुछ देर के लिए हैरान रह गए। दूसरी ओर कोरबा में किसानों ने ज्ञापन सौंपकर बंद पड़े गोठान को फिर से शुरू कराने की मांग उठाई।
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मवेशियों को पकड़कर कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण Stray Cattle
पहला मामला सरगुजा जिले के ग्राम भकुरा का है। यहां आवारा मवेशियों से परेशान किसानों ने अलग अंदाज में अपनी नाराजगी जताई। ग्रामीण गांव और सड़कों पर खुले घूम रहे मवेशियों को पकड़कर कलेक्ट्रेट कार्यालय ले आए।
कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर जब बड़ी संख्या में मवेशी पहुंचे तो वहां मौजूद अधिकारी और कर्मचारियों के सामने भी स्थिति असामान्य हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि पशुपालक अपने मवेशियों को खुले में छोड़ देते हैं, जिसके कारण सड़क पर दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है।
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प्रशासन से कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने आवारा मवेशियों के लिए स्थायी और उचित व्यवस्था किए जाने की मांग प्रशासन के सामने रखी। उनका आरोप है कि नगर निगम की ओर से इस समस्या को लेकर पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
ग्रामीणों ने ऐसे पशुपालकों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है, जो अपने मवेशियों को सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर खुला छोड़ देते हैं। उनका कहना है कि जब तक पशुपालकों पर जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक समस्या का स्थायी समाधान मुश्किल है।
कटघोरा में खेतों में घुस रहे मवेशी Stray Cattle
दूसरा मामला कोरबा जिले के कटघोरा क्षेत्र के ग्राम जुराली का है। यहां किसान लावारिस मवेशियों से परेशान हैं। ग्रामीणों के मुताबिक रात के समय मवेशी खेतों में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ ही अपनी फसल बचाने के लिए रात में भी निगरानी करनी पड़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में गोठान बनाया गया है, लेकिन फिलहाल उसका संचालन बंद पड़ा है। गोठान परिसर में तार और खंभे मौजूद हैं, इसके बावजूद बेसहारा मवेशियों के लिए कोई व्यवस्था नहीं होने से वे सड़कों और खेतों में घूम रहे हैं।
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सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ा
ग्रामीणों ने बताया कि सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। कई बार वाहन चालक अचानक सामने आए मवेशियों से टकरा जाते हैं। ग्रामीणों का दावा है कि ऐसे हादसों में लोगों की जान तक जा चुकी है।
इसी समस्या को लेकर ग्रामीण नगर पालिका और एसडीएम कार्यालय (Stray Cattle) पहुंचे। वहां उन्होंने अपनी शिकायत दर्ज कराते हुए ज्ञापन सौंपा और बंद पड़े गोठान को दोबारा शुरू करने की मांग की।
ग्रामीणों ने साफ कहा है कि यदि जल्द गोठान का संचालन शुरू नहीं किया गया और आवारा मवेशियों की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आगे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
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