सीजी भास्कर, 24 जुलाई : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश में आवारा कुत्तों (Stray Dogs Management) के काटने की बढ़ती घटनाओं, रेबीज के खतरे और राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर घूम रहे आवारा मवेशियों के प्रभावी प्रबंधन को लेकर नाराजगी जताई है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को इस मामले में लगातार निगरानी रखने के निर्देश देते हुए मुख्य सचिव से 22 सितंबर 2026 तक नई प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर मांगी जानकारी
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव ने पूर्व निर्देशों के पालन में शपथपत्र पेश किया। इसमें सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार राज्य सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई।
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि (Stray Dogs Management) आवारा कुत्तों और मवेशियों के प्रबंधन के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई की जा रही है। इसके तहत स्थानीय निकायों और संबंधित विभागों के माध्यम से व्यवस्थाएं सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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योजनाओं के साथ मॉनिटरिंग जरूरी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित मॉनिटरिंग भी जरूरी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला सीधे आम जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसमें लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने कहा कि (Stray Dogs Management) आवारा कुत्तों के हमलों से जहां लोगों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है, वहीं रेबीज जैसी गंभीर बीमारी का खतरा भी बना रहता है। इसी तरह सड़कों पर घूम रहे मवेशियों के कारण सड़क हादसों की आशंका बढ़ जाती है।
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सड़कों पर मवेशियों से हादसों का खतरा Stray Dogs Management
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि (Stray Dogs Management) के साथ-साथ आवारा मवेशियों को नियंत्रित करने के लिए भी प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर घूमने वाले मवेशियों की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत बताई गई है।
हाईकोर्ट ने कहा कि (Stray Dogs Management) से जुड़े कार्य केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए। इसके लिए जिलों में किए जा रहे कार्यों की नियमित समीक्षा और निगरानी आवश्यक है।
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22 सितंबर तक देनी होगी प्रगति रिपोर्ट
डिवीजन बेंच ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि प्रदेशभर में आवारा कुत्तों और मवेशियों के प्रबंधन को लेकर किए गए कार्यों की अद्यतन जानकारी नए शपथपत्र के माध्यम से 22 सितंबर 2026 तक प्रस्तुत की जाए।
अब अगली सुनवाई में हाईकोर्ट राज्य सरकार की ओर से पेश की जाने वाली प्रगति रिपोर्ट का परीक्षण करेगा। कोर्ट ने संकेत दिया है कि (Stray Dogs Management) जैसे आम लोगों की सुरक्षा से जुड़े विषयों पर प्रभावी और जमीन पर दिखाई देने वाली कार्रवाई जरूरी है।
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