सीजी भास्कर, 25 अगस्त : राजधानी में साइबर ठगी (Cyber Fraud) का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जालसाज ने खुद को कार कंपनी का संचालक बताकर भारतीय स्टेट बैंक की आईजीकेवी शाखा की बैंक मैनेजर को भरोसे में लिया और 4 लाख 99 हजार रुपये की ठगी कर ली। आरोपी ने पहले करीब 2 करोड़ रुपये की सावधि जमा कराने का झांसा दिया और बाद में मेडिकल भुगतान के नाम पर आरटीजीएस से रकम ट्रांसफर करा ली।

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दो करोड़ की FD का झांसा देकर बनाया भरोसा Cyber Fraud
रायपुर में हुई इस घटना की जांच के दौरान पुलिस के मुताबिक, बैंक मैनेजर श्वेता शर्मा के मोबाइल पर 20 अगस्त को एक व्यक्ति का फोन आया। फोन नहीं उठने पर आरोपी ने संदेश भेजकर संपर्क किया। उसने खुद को प्रशांत मंधान और इंटारा कार कंपनी का संचालक बताया।
21 अगस्त को आरोपी ने दोपहर में दोबारा फोन किया और करीब 2 करोड़ रुपये की सावधि जमा कराने की बात कही। उसने बैंक मैनेजर से ब्याज दर की जानकारी ली। मैनेजर ने 6.45 प्रतिशत ब्याज दर बताई। आरोपी ने सोमवार को बैंक पहुंचकर एफडी कराने की बात कही। इसी बातचीत के जरिए उसने बैंक मैनेजर का भरोसा हासिल किया और साइबर ठगी (Cyber Fraud) की साजिश को आगे बढ़ाया।
मेडिकल भुगतान के नाम पर मांगे 4.99 लाख
24 अगस्त को आरोपी ने फिर बैंक मैनेजर से संपर्क किया। उसने कहा कि वह दोपहर बाद बैंक आएगा। बातचीत के दौरान उसने बताया कि उसकी चेकबुक खत्म हो गई है और उसे तत्काल मेडिकल भुगतान करना है। इसके लिए उसने 4 लाख 99 हजार रुपये आरटीजीएस के जरिए भेजने की जरूरत बताई।
बैंक मैनेजर ने आरोपी से भुगतान का आवेदन ई-मेल के माध्यम से भेजने को कहा। कुछ देर बाद आरोपी ने फर्जी ई-मेल आईडी से भुगतान संबंधी आवेदन बैंक की आधिकारिक ई-मेल आईडी पर भेज दिया। आवेदन की प्रति उसने बैंक मैनेजर को संदेश के जरिए भी भेजी।
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कंपनी के खाते का विवरण देकर कराया RTGS
आरोपी ने भुगतान के लिए जिस खाते और कंपनी का विवरण दिया, वह वास्तविक कंपनी से जुड़ा हुआ बताया गया। बैंक मैनेजर ने खाते के हस्ताक्षर का मिलान करने के बाद भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। इसके बाद दोपहर करीब 1:20 बजे 4 लाख 99 हजार रुपये आरटीजीएस के माध्यम से मुंबई के कुर्ला स्थित केनरा बैंक के एक खाते में भेज दिए गए।
रकम ट्रांसफर होने के बाद बैंक मैनेजर को पता चला कि पूरा लेनदेन फर्जी पहचान और ई-मेल के जरिए कराया गया था। इस तरह साइबर ठगी (Cyber Fraud) के जरिए बैंक मैनेजर को ही निशाना बनाया गया।
40 मिनट बाद कार कंपनी के मैनेजर ने खोला राज
रकम भेजने के करीब 40 मिनट बाद बैंक मैनेजर को संबंधित कार कंपनी के मैनेजर का फोन आया। उन्होंने बताया कि कंपनी की ओर से बैंक को ऐसा कोई भुगतान आवेदन नहीं भेजा गया है।
इसके बाद बैंक मैनेजर ने कंपनी के बैंक खाते की जानकारी दोबारा जांची। जांच में पता चला कि आरोपी द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर और ई-मेल का कंपनी के खाते में कोई पंजीयन नहीं था। तब बैंक मैनेजर को समझ आया कि जालसाज ने फर्जी ई-मेल और पहचान का इस्तेमाल कर साइबर ठगी (Cyber Fraud) की है।
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तेलीबांधा पुलिस ने दर्ज किया मामला
ठगी का पता चलने के बाद बैंक मैनेजर श्वेता शर्मा ने तेलीबांधा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात मोबाइल नंबर धारक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। आरोपी ने किस तरह फर्जी ई-मेल और पहचान तैयार की और रकम किस खाते में भेजी गई, इस संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है।



