सीजी भास्कर, 11 जून। दंतेवाड़ा जिले के आलनार क्षेत्र में लौह अयस्क खनन और परिवहन से जुड़े दस्तावेजों को लेकर नया विवाद सामने आया है। एक निजी कंपनी द्वारा पिछले नौ वर्षों में 2.75 लाख टन लौह अयस्क के खनन और परिवहन का दावा किया गया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इस दावे पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। दस्तावेजों की पड़ताल में कई विसंगतियां सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। (Dantewada Iron Ore Transport Investigation)
दस्तावेजों में दर्ज ड्राइवरों ने किया दावा खारिज : Dantewada Iron Ore Transport Investigation
खनन और परिवहन से संबंधित दस्तावेजों में जिन वाहनों और ड्राइवरों का उल्लेख किया गया है, उनमें से कई लोगों ने लौह अयस्क परिवहन से किसी भी प्रकार का संबंध होने से इनकार किया है। कुछ लोगों ने बताया कि उनके मोबाइल नंबर और नाम दस्तावेजों में कैसे दर्ज हुए, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
जांच में यह भी सामने आया कि अलग-अलग वाहनों के रिकॉर्ड में एक ही मोबाइल नंबर का उपयोग किया गया है। कुछ मामलों में वाहन मालिकों ने भी संबंधित वाहनों और परिवहन गतिविधियों की जानकारी होने से इनकार किया है। इससे दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
लीज, खनन और परिवहन को लेकर बढ़ा विवाद
आलनार के तरल पहाड़ क्षेत्र में वर्ष 2015 में 31.55 हेक्टेयर भूमि खनन लीज पर दी गई थी। स्थानीय ग्रामीणों ने शुरुआत से ही ग्राम सभा की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे और लीज निरस्त करने की मांग की थी। विरोध के चलते खनन कार्य शुरू नहीं हो सका, लेकिन रिकॉर्ड में लगातार उत्पादन और परिवहन दर्शाए जाने का दावा किया गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस डंपिंग यार्ड में लौह अयस्क रखा जाना बताया गया है, वहां लंबे समय से पुराना खनिज पदार्थ पड़ा हुआ है और उसके आसपास झाड़ियां उग चुकी हैं। इससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि वास्तविक खनन और परिवहन गतिविधियां रिकॉर्ड से मेल नहीं खातीं।
प्रशासन की जांच जारी, ग्रामीणों का आंदोलन तेज : Dantewada Iron Ore Transport Investigation
मामले को लेकर क्षेत्र में विरोध भी बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन शुरू किया है और बड़ी संख्या में लोग पदयात्रा करते हुए जिला मुख्यालय पहुंचे हैं। उनका आरोप है कि खनन और परिवहन से जुड़े रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
जिला प्रशासन ने मामले की जांच के लिए समिति गठित की है, जिसमें खनन, राजस्व और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दस्तावेजों और तथ्यों की विस्तृत जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।



