सीजी भास्कर, 10 जुलाई : छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव की चर्चाओं के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज (Deepak Baij) का तीन वर्षीय कार्यकाल 11 जुलाई को पूरा हो रहा है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के करीबी माने जाने वाले युवा आदिवासी नेता बैज अपने कार्यकाल के अंत तक प्रदेश कार्यकारिणी का गठन नहीं कर सके। ऐसे में वे बिना पूरी टीम बनाए ही अध्यक्ष पद से विदा होने की स्थिति में हैं। कांग्रेस के भीतर इसे संगठनात्मक कमजोरी और लगातार बनी रही गुटबाजी का बड़ा कारण माना जा रहा है।
दीपक बैज को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के समय कांग्रेस नेतृत्व ने उनसे संगठन को मजबूत करने और विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी को नई दिशा देने की उम्मीद जताई थी। लेकिन तीन साल के कार्यकाल में प्रदेश कार्यकारिणी तक का गठन नहीं हो सका। संगठन के कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय तक खाली रहे और जिला व ब्लॉक स्तर पर भी कई नियुक्तियां समय पर नहीं हो पाईं। इसका असर पार्टी की गतिविधियों और विपक्ष की भूमिका पर भी देखने को मिला।
भूपेश, सिंहदेव और महंत गुट के बीच नहीं बन पाया तालमेल
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के अलग-अलग गुट सक्रिय रहे। प्रदेश अध्यक्ष होने के बावजूद दीपक बैज इन सभी गुटों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित नहीं कर पाए। संगठन में फैसलों को लेकर लगातार मतभेद सामने आते रहे, जिसके कारण नई कार्यकारिणी के गठन का मामला लगातार टलता रहा।
विधानसभा चुनाव के बाद और बढ़ी संगठनात्मक चुनौतियां
साल 2023 के विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद कांग्रेस संगठन पहले से ज्यादा कमजोर नजर आया। पार्टी विपक्ष की भूमिका में अपेक्षित आक्रामकता नहीं दिखा सकी। कई मुद्दों पर कांग्रेस नेताओं के अलग-अलग बयान सामने आए, जिससे संगठनात्मक एकजुटता पर भी सवाल उठे। प्रदेश स्तर पर नई रणनीति और टीम की जरूरत लगातार महसूस की जाती रही, लेकिन कार्यकारिणी का गठन नहीं हो पाया।
युवा कांग्रेस में भी दिख रही गुटबाजी
प्रदेश कांग्रेस के साथ-साथ युवा कांग्रेस में भी गुटबाजी खुलकर सामने आ रही है। प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव को लेकर अलग-अलग नेताओं के समर्थक सक्रिय हैं। राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक दुर्ग क्षेत्र में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और विधायक देवेंद्र यादव के समर्थकों के बीच अलग-अलग खेमे दिखाई दे रहे हैं। वहीं महंत, सिंहदेव और बैज समर्थक नेताओं की सक्रियता भी संगठन के भीतर चर्चा का विषय बनी हुई है।
Deepak Baij नए अध्यक्ष को मिलेगी बड़ी चुनौती
दीपक बैज का कार्यकाल समाप्त होने के बाद कांग्रेस नेतृत्व जल्द नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर फैसला कर सकता है। नए अध्यक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एकजुट करना, सभी गुटों के बीच समन्वय स्थापित करना और प्रदेश कार्यकारिणी का गठन कर पार्टी को आगामी चुनावों के लिए तैयार करना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस यदि संगठनात्मक स्तर पर मजबूत नहीं हुई तो आने वाले चुनावों में पार्टी की चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।



