सीजी भास्कर, 19 अप्रैल : प्रधानमंत्री के हालिया राष्ट्र के नाम संबोधन को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। पीएम मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन (PM Address Controversy) को लेकर विपक्षी दलों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। सीपीआई के एक सांसद ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि यह संबोधन आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करता है। उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर जांच शुरू करने की मांग की है।
आचार संहिता उल्लंघन का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि प्रधानमंत्री का संबोधन ऐसे समय प्रसारित किया गया, जब कई राज्यों में चुनावी आचार संहिता लागू है। सांसद के अनुसार यह भाषण पूरी तरह राजनीतिक प्रकृति का था और इसका उद्देश्य एक चल रहे मुद्दे पर जनमत को प्रभावित करना था। (PM Address Controversy) को लेकर उन्होंने इसे चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास बताया है।
सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप
सांसद ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि इस संबोधन का प्रसारण सरकारी प्लेटफॉर्म पर किया गया, जो सार्वजनिक धन से संचालित होते हैं। उनका कहना है कि आचार संहिता लागू रहने के दौरान ऐसे मंचों का उपयोग राजनीतिक संदेश देने के लिए करना नियमों के खिलाफ है। (PM Address Controversy) के इस पहलू को उन्होंने निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के लिए खतरा बताया है।
चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग
पत्र के माध्यम से चुनाव आयोग से अपील की गई है कि वह इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर विस्तृत जांच कराए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे। सांसद ने चेतावनी दी है कि यदि (PM Address Controversy) पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
फिलहाल आयोग की चुप्पी
इस पूरे विवाद के बीच अब तक चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में (PM Address Controversy) को लेकर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।


