सीजी भास्कर, 19 जून। एक समय था जब भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर दूसरे देशों पर निर्भर रहता था, लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल (Defence Export) रही है। रक्षा उत्पादन और सैन्य उपकरणों के निर्माण में देश ने बीते कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। यही वजह है कि अब भारत न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि दुनिया के कई देशों को रक्षा उपकरण भी निर्यात कर रहा है।
रक्षा क्षेत्र से जुड़े ताजा आंकड़ों ने यह संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक रक्षा बाजार में और मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी में है। इसी दिशा में केंद्र सरकार ने एक नया लक्ष्य भी तय किया है।
नागपुर में बड़ी परियोजना का भूमि पूजन : Defence Export
केंद्रीय रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने महाराष्ट्र के नागपुर में यंत्र इंडिया लिमिटेड के आयुध निर्माण परिसर में 10 हजार टन क्षमता वाली एल्युमिनियम एक्सट्रूजन प्रेस परियोजना का भूमि पूजन किया।
इस अवसर पर Devendra Fadnavis भी मौजूद रहे। यह परियोजना रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए उच्च गुणवत्ता वाले एल्युमिनियम कॉम्पोनेंट्स के निर्माण में मदद करेगी और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
रक्षा उत्पादन में कई गुना बढ़ोतरी
रक्षा मंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 में देश का घरेलू रक्षा उत्पादन लगभग 46 हजार करोड़ रुपये था। वर्तमान में यह बढ़कर 1 लाख 78 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। उनके अनुसार यह केवल उत्पादन में वृद्धि नहीं है, बल्कि देश की तकनीकी क्षमता और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी का भी प्रतीक है।
अब कितना हथियार बेचता है भारत
रक्षा मंत्री के मुताबिक वर्ष 2014 में भारत का रक्षा (Defence Export) निर्यात 1 हजार करोड़ रुपये से भी कम था। अब यह बढ़कर रिकॉर्ड 38 हजार 424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारतीय रक्षा उद्योग अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हो रहा है और कई देशों का भरोसा जीत रहा है।
अगले तीन साल का बड़ा लक्ष्य
सरकार ने आने वाले दो से तीन वर्षों के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। रक्षा मंत्री ने बताया कि देश का लक्ष्य 3 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन और 50 हजार करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात हासिल करना है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस लक्ष्य को तय समय से पहले पूरा करने की दिशा में काम कर रही है।
आत्मनिर्भरता पर दिया जोर
रक्षा मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि देश की सुरक्षा जरूरतों को अपने संसाधनों और तकनीक के बल पर पूरा करना भी है। उनके अनुसार जब ज्ञान, तकनीक, कुशल मानव संसाधन और आत्मविश्वास एक साथ जुड़ते हैं, तभी कोई देश वास्तविक अर्थों में आत्मनिर्भर बनता है।
आधुनिक उपकरणों की भूमिका भी अहम
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने सैन्य उपकरणों की गुणवत्ता पर भी जोर (Defence Export) दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी देश की सुरक्षा केवल सैनिकों की बहादुरी से नहीं, बल्कि आधुनिक और भरोसेमंद उपकरणों से भी मजबूत होती है। इसी सोच के साथ भारत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने और वैश्विक निर्यातक बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।





