सीजी भास्कर, 09 जून : धान की खेती में आधुनिक तकनीकों का उपयोग किसानों (DSR Paddy Farming) के लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है। बदलते मौसम, बढ़ती मजदूरी और सिंचाई की चुनौतियों के बीच किसान अब Direct Seeded Rice (DSR) और लाइन बोनी तकनीक की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का दावा है कि इन तकनीकों के जरिए खेती की लागत में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी लाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
कम बीज में ज्यादा उत्पादन
पारंपरिक धान खेती में जहां प्रति हेक्टेयर 75 से 80 किलोग्राम बीज की जरूरत पड़ती है, वहीं डीएसआर और लाइन बोनी पद्धति में केवल 30 से 35 किलोग्राम बीज ही पर्याप्त होता है। कतारबद्ध बुवाई के कारण पौधों को पर्याप्त धूप, हवा और पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे फसल की वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन बढ़ता है।
क्या है DSR तकनीक?
डीएसआर यानी Direct Seeded Rice तकनीक में नर्सरी तैयार कर रोपाई करने की आवश्यकता नहीं होती। किसान सीधे खेत में बीज की बुवाई करते हैं। इससे रोपाई में लगने वाला समय, श्रम और खर्च काफी हद तक कम हो जाता है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार डीएसआर तकनीक से 15 से 30 प्रतिशत तक पानी की बचत संभव है, जो जल संकट वाले क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है।
लाइन बोनी से आसान हुआ फसल प्रबंधन
लाइन बोनी तकनीक में धान की बुवाई निश्चित दूरी और कतारों में की जाती है। इससे खरपतवार नियंत्रण, उर्वरक प्रबंधन और सिंचाई कार्य आसान हो जाता है। साथ ही खेत में मशीनों का उपयोग भी सुगमता से किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कतारों के बीच 20 से 25 सेंटीमीटर तथा पौधों के बीच 5 से 7 सेंटीमीटर की दूरी रखने से फसल का विकास बेहतर होता है।
किसानों को मिल रहा सीधा लाभ
बालोद जिले के प्रगतिशील किसान प्रदीप साहू पिछले 10 वर्षों से सीड ड्रिल और लाइन बोनी तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस पद्धति से खेती की लागत में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी आई है, जबकि उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। उनके अनुसार कम बीज, कम मजदूरी और कम पानी में बेहतर पैदावार मिलने से किसानों की आमदनी बढ़ रही है।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञ किसानों को प्रति हेक्टेयर 40 से 50 किलोग्राम बीज का उपयोग करने तथा वैज्ञानिक पद्धति से बुवाई करने की सलाह दे रहे हैं। उनका मानना है कि बदलते कृषि परिदृश्य में आधुनिक तकनीकों को अपनाकर धान उत्पादन को अधिक लाभदायक और टिकाऊ बनाया जा सकता है।



