सीजी भास्कर, 13 जून। दुर्ग जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत मोहन नगर पुलिस और साइबर सेल ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये लोग अपने बैंक खातों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त रकम के ट्रांसफर और अवैध वित्तीय लेन-देन के लिए कर रहे थे। (Durg Cyber Crime)
पुलिस जांच में सामने आया कि विभिन्न बैंक खातों में संदिग्ध ट्रांजेक्शन किए गए, जिनका संबंध देशभर में हुई साइबर ठगी की शिकायतों से जुड़ा हुआ है।
Durg Cyber Crime : कैसे हुआ खुलासा?
भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित समन्वय पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच के दौरान मोहन नगर थाना क्षेत्र से जुड़े कई खातों में संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं।
जांच में पाया गया कि साइबर ठगी से प्राप्त रकम को अलग-अलग खातों में जमा किया गया और बाद में उसे अन्य खातों में स्थानांतरित कर आर्थिक लाभ कमाया गया। तकनीकी विश्लेषण और बैंकिंग दस्तावेजों की पड़ताल के बाद पुलिस ने आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
क्या होते हैं म्यूल बैंक Durg Cyber Crime अकाउंट?
साइबर अपराध की दुनिया में म्यूल बैंक अकाउंट ऐसे खाते होते हैं जिनका उपयोग ठगी की रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किया जाता है। कई मामलों में खाताधारक लालच या कमीशन के बदले अपना बैंक खाता अपराधियों को उपलब्ध करा देते हैं।
पुलिस का कहना है कि ऐसा करने वाला व्यक्ति भी अपराध की श्रृंखला का हिस्सा माना जाता है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

किन धाराओं में हुई कार्रवाई? : Durg Cyber Crime
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 329/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 317(2) के तहत वैधानिक कार्रवाई की है।
जब्त किए गए महत्वपूर्ण दस्तावेज
बैंक खातों से संबंधित रिकॉर्ड
वित्तीय लेन-देन के दस्तावेज
इलेक्ट्रॉनिक एवं बैंकिंग अभिलेख
तकनीकी जांच से जुड़े दस्तावेज
पुलिस टीम की रही अहम भूमिका
इस कार्रवाई को सफल बनाने में मोहन नगर थाना पुलिस, साइबर सेल तथा विवेचना अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। तकनीकी जांच, बैंकिंग डेटा विश्लेषण और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क तक पहुंच बनाई गई।

1. साइबर अपराध का नया ट्रेंड
अब अपराधी सीधे ठगी करने के बजाय आम लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर रकम को कई स्तरों पर ट्रांसफर कर रहे हैं, जिससे जांच एजेंसियों के लिए ट्रैकिंग चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
2. युवाओं की बढ़ती संलिप्तता चिंता का विषय
गिरफ्तार आरोपियों में अधिकांश की उम्र 19 से 30 वर्ष के बीच है। यह संकेत देता है कि आसान कमाई के लालच में युवा वर्ग साइबर नेटवर्क का हिस्सा बन रहा है।
3. बैंक खाता देना भी अपराध
कई लोग मामूली कमीशन के बदले अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या नेट बैंकिंग एक्सेस दूसरे लोगों को दे देते हैं। हालांकि कानून की नजर में यह गंभीर अपराध है और खाताधारक भी आरोपी बन सकता है।
4. साइबर ठगी का पैसा स्थानीय नेटवर्क तक पहुंच रहा
इस मामले से साफ है कि साइबर अपराध अब केवल ऑनलाइन दुनिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए स्थानीय स्तर पर बैंक खातों और लोगों का नेटवर्क तैयार किया जा रहा है।
5. आम नागरिकों के लिए बड़ा संदेश
यदि कोई व्यक्ति बैंक खाता किराए पर लेने, एटीएम कार्ड उपयोग करने या खाते में पैसा जमा कर कमीशन देने का प्रस्ताव देता है, तो तुरंत सावधान हो जाएं। यह साइबर अपराध का हिस्सा हो सकता है।
दुर्ग पुलिस की महत्वपूर्ण अपील
किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता उपयोग करने के लिए न दें।
एटीएम कार्ड, पासबुक, ओटीपी और नेट बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
संदिग्ध ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की तत्काल सूचना दें।
साइबर ठगी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
दुर्ग पुलिस की यह कार्रवाई केवल 15 आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि साइबर ठगी के उस नेटवर्क पर प्रहार है जो आम लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर अपराध की रकम को वैध दिखाने की कोशिश करता है। आने वाले समय में ऐसे मामलों में और बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।




