सीजी भास्कर, 29 जुलाई : छत्तीसगढ़ का अचानकमार टाइगर रिजर्व (Tiger Reserve Chhattisgarh) अब बाघ संरक्षण का मजबूत केंद्र बनकर उभर रहा है। यहां मौजूद 18 बाघों में से 8 बाघ मध्य भारत के दूसरे जंगलों से प्राकृतिक रूप से पहुंचे हैं। इन बाघों के आने से न केवल बाघों की संख्या बढ़ी है, बल्कि प्रजनन भी तेज हुआ है, जिससे जीन पूल मजबूत हो रहा है।
यह भी पढ़ें : Gariaband Nala Accident : उफनते सरगी नाले में बहा ग्रामीण, 5 किमी दूर मिला शव
दूसरे जंगलों से पहुंचे 8 बाघ
वन विभाग के अनुसार, बांधवगढ़, कान्हा और पेंच टाइगर रिजर्व से कई बाघ अचानकमार (Tiger Reserve Chhattisgarh) पहुंचे हैं। बांधवगढ़ से आई बाघिन एकेटी-8, पेंच से आई एकेटी-14 और कान्हा से आई एकेटी-22 यहां शावकों को जन्म दे चुकी हैं। वहीं, सूरजपुर में घायल मिली बाघिन एटीआर-16 का उपचार कर दोबारा जंगल में छोड़ा गया था। अब वह भी प्रजनन कर रही है।
यह भी पढ़ें : Gariaband Nala Accident : उफनते सरगी नाले में बहा ग्रामीण, 5 किमी दूर मिला शव
कॉरिडोर से मिल रही नई जिंदगी
विशेषज्ञों का कहना है कि अचानकमार (Tiger Reserve Chhattisgarh) कान्हा, बांधवगढ़ और गुरु घासीदास-तमोर पिंगला क्षेत्र से तीन प्रमुख वन्यजीव कॉरिडोर के जरिए जुड़ा है। इसी वजह से बाघ एक जंगल से दूसरे जंगल तक सुरक्षित पहुंच रहे हैं। इससे आनुवंशिक विविधता बनी रहती है और बाघों की नई पीढ़ी अधिक स्वस्थ होती है।
यह भी पढ़ें : Kharif Sowing 2026 : प्रदेश में खेती-किसानी का काम तेज़ी के साथ जारी, 80 प्रतिशत बोनी पूर्ण
बाघों के लिए अनुकूल है अचानकमार
अचानकमार को वर्ष 1975 में अभयारण्य घोषित किया गया था। इसके बाद 9 फरवरी 2009 को इसे टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला। वर्तमान में इसका कुल क्षेत्रफल 914.017 वर्ग किलोमीटर है। इसमें 626.195 वर्ग किलोमीटर कोर क्षेत्र और 287.822 वर्ग किलोमीटर बफर क्षेत्र शामिल है। घने जंगल, पर्याप्त शिकार और जल स्रोत इसे बाघों के लिए आदर्श आवास बनाते हैं।
यह भी पढ़ें : Durg Cash Theft : कारोबारी की कार का शीशा तोड़ 4.90 लाख की चोरी
कॉरिडोर बचाना सबसे बड़ी चुनौती
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सड़क, रेल लाइन, खनन या अन्य विकास कार्यों से वन्यजीव कॉरिडोर प्रभावित होते हैं, तो भविष्य में बाघों की आवाजाही रुक सकती है। इससे जीन पूल पर भी नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है। इसलिए कॉरिडोर का संरक्षण बेहद जरूरी माना जा रहा है।
यह भी पढ़ें : Durg Cash Theft : कारोबारी की कार का शीशा तोड़ 4.90 लाख की चोरी
बाघ शिकार अब भी चिंता का विषय
इधर, जबलपुर की वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन टीम ने सूरजपुर में बाघ की खाल के साथ पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में बड़े शिकार गिरोह की आशंका जताई गई है। वन विभाग यह पता लगा रहा है कि बाघ का शिकार कहां हुआ और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।
यह भी पढ़ें : Chhattisgarh Monsoon Update : मानसून ने पकड़ी रफ्तार, अगले दो दिन भारी वर्षा का अलर्ट
चार महीने में सामने आए पांच मामले Tiger Reserve Chhattisgarh
वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, सूरजपुर की घटना को मिलाकर प्रदेश में पिछले चार महीनों में बाघ शिकार के पांच मामले सामने आए हैं। इससे पहले दंतेवाड़ा और बीजापुर में भी ऐसी घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं। वहीं, पिछले दो दशकों में राज्य में करीब 30 बाघों के शिकार की पुष्टि हुई है। इसलिए संरक्षण के साथ-साथ निगरानी और सख्त कार्रवाई पर भी जोर दिया जा रहा है।
यह भी पढ़ें : Bilaspur Cobra Bite : साप्ताहिक बाजार में करेले के ढेर से निकला कोबरा



