सीजी भास्कर, 6 सितंबर : छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर साय मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चा (State Politics) तेज हो गई है। भाजपा संगठन में संभावित बदलाव और केंद्र में मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाओं के बीच राज्य सरकार के मंत्रियों के विभाग और चेहरों को लेकर नए राजनीतिक समीकरणों के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
- प्रदेश भाजपा संगठन में बदलाव से बढ़ी हलचल State Politics
- फेरबदल हुआ तो बदलेंगे सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण
- मुख्यमंत्री समेत 14 सदस्यीय मंत्रिमंडल
- OBC वर्ग का सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व
- क्षेत्रीय संतुलन पर भी उठ रहे सवाल
- किन मंत्रियों के नामों पर सबसे ज्यादा चर्चा?
- OBC कोटे में बदलाव के भी कयास
- फिलहाल आधिकारिक फैसले का इंतजार

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प्रदेश भाजपा संगठन में बदलाव से बढ़ी हलचल State Politics
साय मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चा (State Politics) को भाजपा प्रदेश संगठन में संभावित बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है। केंद्र में भी मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलें चल रही हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ की राजनीति में संभावित बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
राजनीतिक गलियारों में केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू की भूमिका बदलने की संभावना की चर्चा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें प्रदेश भाजपा संगठन की जिम्मेदारी मिल सकती है। उनकी जगह छत्तीसगढ़ से किसी अन्य सांसद को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दिए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि, इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
फेरबदल हुआ तो बदलेंगे सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण
यदि साय सरकार में बदलाव होता है तो इसका असर सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर पड़ सकता है। कुछ मंत्रियों के विभाग बदले जाने के साथ ही नए चेहरों को मौका देने और कुछ मौजूदा मंत्रियों को हटाने की चर्चा है।
ऐसे में साय मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चा (State Politics) सिर्फ विभागों तक सीमित नहीं रहेगी। इसका असर सरकार के भीतर राजनीतिक और क्षेत्रीय समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
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मुख्यमंत्री समेत 14 सदस्यीय मंत्रिमंडल
छत्तीसगढ़ सरकार में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित कुल 14 सदस्य हैं। इनमें दो उपमुख्यमंत्री शामिल हैं। रामविचार नेताम, केदार कश्यप और दयालदास बघेल भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। ये पूर्ववर्ती रमन सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं।
वहीं अन्य कई मंत्री पहली बार राज्य मंत्रिमंडल का हिस्सा बने हैं। संभावित बदलाव की चर्चा में वरिष्ठता, अनुभव, सामाजिक समीकरण और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व जैसे पहलुओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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OBC वर्ग का सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व
मौजूदा मंत्रिमंडल के सामाजिक समीकरण पर नजर डालें तो मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, रामविचार नेताम और केदार कश्यप आदिवासी वर्ग से आते हैं। अनुसूचित जाति वर्ग से दयालदास बघेल और गुरु खुशवंत साहब मंत्रिमंडल में शामिल हैं।
ओबीसी वर्ग से उपमुख्यमंत्री अरुण साव के अलावा लखन देवांगन, श्यामबिहारी जायसवाल, ओपी चौधरी, टंकराम वर्मा, गजेन्द्र यादव और लक्ष्मी राजवाड़े शामिल हैं। सामान्य वर्ग से उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और राजेश अग्रवाल मंत्रिमंडल का हिस्सा हैं।
इस लिहाज से ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व सबसे अधिक है। वहीं सामान्य वर्ग की संख्या अपेक्षाकृत कम है। मौजूदा मंत्रिमंडल में अल्पसंख्यक वर्ग का प्रतिनिधित्व भी नहीं है।
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क्षेत्रीय संतुलन पर भी उठ रहे सवाल
क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की बात करें तो रायगढ़ से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और ओपी चौधरी मंत्रिमंडल में हैं। सरगुजा से रामविचार नेताम, राजेश अग्रवाल और लक्ष्मी राजवाड़े प्रतिनिधित्व करते हैं। कोरबा से श्यामबिहारी जायसवाल और लखन देवांगन शामिल हैं।
बिलासपुर से अरुण साव, दुर्ग से दयालदास बघेल, राजनांदगांव से विजय शर्मा, रायपुर से टंकराम वर्मा और गुरु खुशवंत साहब तथा बस्तर से केदार कश्यप मंत्रिमंडल में हैं।
वहीं कांकेर और महासमुंद लोकसभा क्षेत्रों से फिलहाल मंत्रिमंडल में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। यही वजह है कि संभावित फेरबदल में क्षेत्रीय संतुलन भी चर्चा का बड़ा आधार बना हुआ है।
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किन मंत्रियों के नामों पर सबसे ज्यादा चर्चा?
राजनीतिक चर्चाओं में दोनों उपमुख्यमंत्रियों के बने रहने की संभावना जताई जा रही है। वरिष्ठता और अनुभव के आधार पर रामविचार नेताम और केदार कश्यप को भी अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जा रहा है।
नए मंत्रियों में गुरु खुशवंत साहब, राजेश अग्रवाल और गजेन्द्र यादव के नाम सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। ओबीसी वर्ग से ओपी चौधरी और श्यामबिहारी जायसवाल की मौजूदा भूमिका बरकरार रहने के कयास भी लगाए जा रहे हैं।
दूसरी ओर लखन देवांगन, टंकराम वर्मा और लक्ष्मी राजवाड़े के नामों को लेकर भी चर्चा है। अनुसूचित जाति वर्ग से वरिष्ठ नेता दयालदास बघेल को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, दुर्ग लोकसभा क्षेत्र से वे मंत्रिमंडल में अकेले प्रतिनिधि हैं और एससी वर्ग के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। इसलिए उनके भविष्य को लेकर अभी कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
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OBC कोटे में बदलाव के भी कयास
मंत्रिमंडल में ओबीसी वर्ग के मौजूदा प्रतिनिधित्व में बदलाव की भी चर्चा है। राजनीतिक गलियारों में सामान्य, अल्पसंख्यक और आदिवासी वर्ग को अधिक प्रतिनिधित्व देने की संभावना जताई जा रही है।
यदि ऐसा बदलाव होता है तो कोरबा और सरगुजा जैसे क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। रायपुर लोकसभा क्षेत्र के समीकरण बदलने पर महासमुंद को प्रतिनिधित्व देने की संभावना की चर्चा भी है। इसके अलावा रायपुर क्षेत्र से अल्पसंख्यक वर्ग को प्रतिनिधित्व मिलने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।
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फिलहाल आधिकारिक फैसले का इंतजार
साय मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चा (State Politics) फिलहाल राजनीतिक कयासों पर आधारित है। भाजपा संगठन, केंद्र सरकार या राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
ऐसे में यह तय नहीं माना जा सकता कि मंत्रिमंडल में बदलाव होगा या किन चेहरों और विभागों पर इसका असर पड़ेगा। फिलहाल सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है और अंतिम तस्वीर आधिकारिक फैसले के बाद ही साफ होगी।




