सीजी भास्कर, 6 सितंबर : छत्तीसगढ़ के जंगलों में मिलने वाली दुर्लभ वनौषधियां (Forest Medicine Smuggling) अब तस्करी के कारण संकट में हैं। औषधीय पौधों को ट्रकों में भरकर दूसरे राज्यों तक भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। पिछले तीन महीनों में वन विभाग की कार्रवाई में वनौषधियों से लदे दो ट्रक पकड़े जा चुके हैं।
बस्तर क्षेत्र में वनौषधियों की तस्करी को लेकर खास चिंता सामने आई है। विशेषज्ञों के सर्वे में राज्य की करीब 112 वनौषधि प्रजातियों के प्राकृतिक अस्तित्व पर खतरा बताया गया है। इनमें 50 से ज्यादा प्रजातियां गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के निर्माण में काम आती हैं।
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जड़ समेत पौधे उखाड़ने से बढ़ा संकट
बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया के वैज्ञानिकों ने मैदानी सर्वे के बाद संकटग्रस्त वनौषधियों का जर्मप्लाज सुरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू की है। हाल ही में वैज्ञानिकों की टीम ने करीब एक दर्जन प्रजातियों का जर्मप्लाज एकत्र किया है। इसे कोलकाता स्थित संस्थान में संरक्षित किया जाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक सबसे बड़ी चिंता यह है कि कई औषधीय पौधों को जड़ सहित उखाड़ दिया जाता है। इससे उनके दोबारा विकसित होने की संभावना खत्म हो जाती है। ग्रामीणों को लालच देकर पौधे और उनकी जड़ें निकलवाने की बात भी सामने आई है। इससे वनौषधियों की तस्करी (Forest Medicine Smuggling) का खतरा और बढ़ गया है।
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कई जरूरी दवाओं में होता है इस्तेमाल
वच, मालकांगनी, बल्बोसा, दौना, सफेद मूसली और दहिमन जैसी वनौषधियों का इस्तेमाल अलग-अलग आयुर्वेदिक दवाओं में किया जाता है। वहीं गुड़मार का उपयोग मधुमेह से जुड़ी दवाओं में किया जाता है। कलिहारी गठिया और जोड़ों के दर्द की दवाओं में उपयोगी मानी जाती है। केवांच का इस्तेमाल पार्किंसंस के उपचार में किया जाता है।
मैदा छाल, बेचांदी और अन्य प्रजातियों का इस्तेमाल पारंपरिक औषधियों और च्यवनप्राश जैसी तैयारियों में भी होता है। इन प्रजातियों की संख्या लगातार कम होने से भविष्य में औषधीय उपयोग के लिए इनकी उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
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बस्तर से बाहर भेजे जाने की आशंका
करीब तीन महीने पहले माचकोट के पास ग्रामीणों ने वनौषधियों से लदा एक ट्रक रोककर वन विभाग को सूचना दी थी। इसके अलावा करीब एक महीने पहले पामेड़ क्षेत्र में भी ग्रामीणों ने देर रात एक संदिग्ध ट्रक को रोकने की कोशिश की। सूचना मिलने के बावजूद टीम के पहुंचने में समय लगा। इसी दौरान ट्रक वहां से निकल गया।
वन विभाग अब वनौषधि तस्करी (Forest Medicine Smuggling) रोकने के लिए ग्रामीणों की मदद लेने और जागरूकता बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है। गांवों में लोगों को वनौषधियों को जड़ सहित नष्ट करने से रोकने और इनके संरक्षण के लिए जागरूक किया जा रहा है।
संरक्षण के लिए जर्मप्लाज सुरक्षित करने पर जोर
विशेषज्ञों के सर्वे के बाद संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है। वैज्ञानिकों द्वारा जर्मप्लाज एकत्र करने का उद्देश्य दुर्लभ वनौषधियों की आनुवंशिक सामग्री को सुरक्षित रखना है।
वनौषधियों की तस्करी (Forest Medicine Smuggling) पर रोक लगाने के साथ स्थानीय स्तर पर इनके संरक्षण की जरूरत भी बढ़ गई है। ग्रामीणों की निगरानी और सहयोग से जंगलों में मौजूद इन महत्वपूर्ण प्रजातियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
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