सीजी भास्कर, 01 जून : छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव (Durg Youth Congress Election) में उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा होते ही भिलाई और दुर्ग संभाग की सियासत में भारी उबाल आ गया है. भिलाई नगर, दुर्ग शहर और दुर्ग ग्रामीण जिलों में अध्यक्ष पद के तमाम रसूखदार दावेदार अब हवा-हवाई दावों को छोड़कर जमीनी स्तर पर डिजिटल ‘वोट बैंक’ तैयार करने के लिए पूरी ताकत से मैदान में उतर चुके हैं. इस बार का मुकाबला एक नए और बेहद कड़े चरण में प्रवेश कर चुका है, जहां उम्मीदवारों की जीत का फैसला उनकी संगठनात्मक क्षमता और ज्यादा से ज्यादा सदस्य जुटाने की रणनीतिक कुशलता से तय होगा.
दरअसल, इस बार युवा कांग्रेस (Durg Youth Congress Election) का यह अंदरूनी चुनाव पारंपरिक बैलेट पेपर या पर्चियों के बजाय पूरी तरह हाईटेक और ऑनलाइन डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से संपन्न कराया जा रहा है. इस डिजिटल बदलाव ने बड़े-बड़े सियासी सूरमाओं के समीकरणों को पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया है. अब किसी बड़े नेता का वरदहस्त होना या जातिगत व गुटीय समीकरणों के भरोसे रहना जीत की गारंटी नहीं माना जा रहा है. उम्मीदवारों के सामने सबसे बड़ी और कड़ी चुनौती तय समय सीमा के भीतर कड़े नियमों के तहत अधिक से अधिक युवाओं को संगठन के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने और फिर उनसे ऑनलाइन मतदान करवाने की होगी.
इस डिजिटल चुनाव (Durg Youth Congress Election) को लेकर युवाओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है. चुनावी नियमों के अनुसार, संगठन का प्रत्येक नया सदस्य कुल छह अलग-अलग सांगठनिक पदों के लिए एक साथ मतदान करने का अधिकार रखेगा. यही वजह है कि सभी दावेदार इस ऑनलाइन सदस्यता अभियान को अपनी जीत की सबसे महत्वपूर्ण और कड़क चाबी मान रहे हैं. जिला अध्यक्ष पद से लेकर नीचे के पदों तक के सभी दावेदारों ने अपनी-अपनी टीमें बनाकर कॉलेज परिसरों, कोचिंग सेंटरों और ग्रामीण अंचलों में कड़ा संपर्क अभियान शुरू कर दिया है.
इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, बीते 30 मई को दुर्ग के राजीव भवन में एक बेहद महत्वपूर्ण और कूटनीतिक संगठनात्मक बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में भिलाई नगर, दुर्ग शहर और दुर्ग ग्रामीण जिलों के सभी अधिकृत प्रत्याशी और उनके प्रस्तावक शामिल हुए. बैठक में प्रदेश से आए संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों और चुनाव प्रभारियों ने ऑनलाइन मतदान व्यवस्था और डिजिटल सदस्यता की बारिकियों को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए.
बैठक में दोटूक स्पष्ट किया गया कि फॉर्म भरने, सदस्य बनाने से लेकर अंतिम मतदान तक की पूरी प्रक्रिया केवल और केवल डिजिटल माध्यम से ही स्वीकार्य होगी. संगठन ने सभी प्रत्याशियों को कड़े तेवर में हिदायत दी है कि वे पूरी पारदर्शिता और तय नियमों के भीतर रहकर ही अपना सदस्यता अभियान चलाएं. किसी भी प्रकार की तकनीकी गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा पाए जाने पर उम्मीदवारी निरस्त की जा सकती है. इसके साथ ही, सभी सक्रिय कार्यकर्ताओं को आगामी दिनों में रिकॉर्ड संख्या में नए और ऊर्जावान युवाओं को संगठन से जोड़ने का एक बड़ा कड़ा लक्ष्य भी सौंपा गया है.
डिजिटल चुनाव के कड़े नियम
पूरी तरह ऑनलाइन : इस बार सदस्यता फॉर्म भरने से लेकर वोटिंग तक सब कुछ मोबाइल और कंप्यूटर के जरिए डिजिटल मोड में होगा.
6 पदों के लिए एक वोट : हर नया सदस्य छह अलग-अलग पदों के उम्मीदवारों को चुनकर अपना मतदान कर सकेगा.
राजीव भवन में मंथन : 30 मई को दुर्ग के राजीव भवन में तीनों जिलों के प्रत्याशियों को कड़े चुनावी नियमों का पाठ पढ़ाया गया.
गुटीय समीकरण हुए फेल!
इस बार किसी बड़े राजनेता या आका के भरोसे चुनाव जीतना मुमकिन नहीं होगा. जो उम्मीदवार अपनी टीम के जरिए ग्राउंड पर जाकर सबसे ज्यादा ऑनलाइन सदस्य बनवाएगा और उनसे सफलतापूर्वक डिजिटल वोट डलवाएगा, वही इस त्रिकोणीय और कड़े मुकाबले का असली सिकंदर बनेगा.




