सीजी भास्कर, 18 सितंबर। पहली झलक में कुछ ऐसा लगा जैसे रात में कोई भयंकर हुंकार गूंज (Elephant Herd Attack) उठा हो। आहट इतनी तेज थी कि लोग पलट कर देखने भी डर रहे थे। हवाओं में मिट्टी और टूटते हुए कचलों की गूँज थी। कुछ ही देर में सामने आया कि यह आम आवाज़ नहीं, बल्कि बड़े जानवरों का व्यवधान है। पूरा इलाका एकदम सन्न और खौफ में डूब गया , कोई समझ ही नहीं पा रहा था कि आगे क्या होगा।
घटना का खुलासा और क्षेत्र
बाद में पता चला कि यह हाथियों की चिंघाड़ हैं। घटना कोरबा के बांगो थाना क्षेत्र के मोरगा जंगल में हुई, जहाँ सूरजपुर जिले से आए 12 बाहरी हाथियों के झुंड ने अचानक उत्पात मचाया। पहले से कटघोरा वन मंडल में लगभग 52 स्थानीय हाथी विचरण कर रहे थे, और बाहरी झुंड के आगमन से मानवीय-वन्य तकराव और तेज़ हो गया है। यह सारा घटनाक्रम स्थानीय लोगों के लिए एक बड़े हाथी हमले (Elephant Herd Attack) जैसा साबित हुआ है।
झुंड के आगमन से ग्रामीणों में दहशत
घरों की खिड़कियाँ टूटी हुईं और कुछ मकानों की दीवारें गिर गईं। ग्रामीण बताते हैं कि हाथियों ने रात में आकर खेतों में घुसकर फसलें बर्बाद कर दीं और कई जगह पर अव्यवस्था फैला दी। बच्चे और बूढ़े दोनों ही डर के मारे घर के बाहर निकलने में हिचक रहे हैं। लोग रात में पहरा देने लगे हैं पर भय के कारण नींद उड़ चुकी है। इस भयावह व्यवहार को लोग स्थानीय रूप से हाथी हमले (Elephant Herd Attack) ही मान रहे हैं।
फसल और आवास को बड़ा नुकसान
किसानों का कहना है कि कई एकड़ में खड़ी फसलें नष्ट हो गई हैं। धान, मकई और सब्जियों के बचे-खुचे हिस्सों पर भी भारी क्षति हुई है। घरों के आंगनों से सामान उखाड़ा गया और कुछ ग्रामीणों के घरों की छतें भी जर्जर हो गईं। आर्थिक नुकसान के चलते चिंता चरम पर है और लोग तत्काल मुआवजे की मांग कर रहे हैं। कई किसान अपने लगे-जल्द बीज और खाद की भरपाई के लिये प्रशासन से सहायता मांग रहे हैं।
वन विभाग की कार्रवाई और सुझाव
वन विभाग ने तुरंत सुरक्षात्मक उपाय लागू किए हैं — विशेष टीम तैनात की गई, ध्वनि-रोक उपकरणों और वाटर-पॉइंट से दूर करने की कोशिशें शुरू हुईं, एवं स्थानीय लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों का कहना है कि जंगल में पानी व भोजन की कमी, तथा बाहरी झुंड का आना इस हाथी हमले (Elephant Herd Attack) का प्रमुख कारण हो सकता है और दीर्घकालिक उपायों में जल-स्रोत तथा आवासीय बेल्टों के प्रबंधन पर काम किया जाएगा।
लोगों की नाराजगी और प्रशासन से मांग
ग्रामीण प्रशासन से त्वरित मुआवजा, फसलों का आकलन और हाथियों को जंगल वापस भेजने के ठोस प्लान की माँग कर रहे हैं। स्थानीय लोग चाहते हैं कि घाटती का ब्योरा जल्द तैयार कर मुआवजा दिया जाए और भविष्य में सुरक्षा के ठोस इंतज़ाम किए जाएँ ताकि पालन-पोषण और रोज़गार प्रभावित न हों। स्थानीय नेता और किसान दोनों दीर्घकालिक समाधान की माँग उठा रहे हैं ताकि इस प्रकार के हाथी हमले (Elephant Herd Attack) फिर न हों।



