सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी मृत यात्री के पास से ट्रेन का टिकट बरामद नहीं होने मात्र से मुआवजे के दावे को खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने गुजरात में वर्ष 2017 में चलती ट्रेन से गिरकर जान गंवाने वाले एक व्यक्ति के माता-पिता को दिए गए मुआवजे को बहाल कर दिया।
मृतक के परिजनों को राहत
मामले में मृतक के माता-पिता की ओर से मुआवजे का दावा किया गया था। निचली अदालत द्वारा दी गई मुआवजा राशि को बाद में चुनौती दी गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान मृतक के पास से ट्रेन टिकट नहीं मिलने को भी आधार बनाया गया था।
सिर्फ टिकट नहीं मिलने से दावा खारिज नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मृतक के पास टिकट बरामद न होना अपने आप में मुआवजा देने से इनकार करने का पर्याप्त आधार नहीं है। अदालत के इस फैसले से ऐसे मामलों में मृत यात्रियों के परिजनों के मुआवजा दावों को राहत मिली है।



