सीजी भास्कर, 28 जून। गलघोंटू बीमारी (Galghontu Disease) के बढ़ते खतरे को देखते हुए पशुधन विकास विभाग ने राज्यभर के पशुपालकों के लिए अलर्ट जारी किया है। मानसून के दौरान तेजी से फैलने वाली इस जीवाणुजनित बीमारी से पशुधन को बचाने के लिए विभाग ने समय पर गलघोंटू बीमारी (Galghontu Disease) का टीकाकरण कराने और किसी भी लक्षण पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करने की अपील की है। साथ ही राज्य के सभी जिलों में निगरानी और सतर्कता बढ़ाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
मानसून में तेजी से फैलती है बीमारी
पशुधन विकास विभाग के अनुसार गलघोंटू बीमारी (Galghontu Disease) मुख्य रूप से गाय, भैंस और भेड़ों को प्रभावित करती है। मानसून के दौरान नमी और मौसम में बदलाव के कारण इस संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। समय पर टीकाकरण और शीघ्र उपचार से इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
ये हैं बीमारी के प्रमुख लक्षण
विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमित पशुओं में तेज बुखार, गले और जबड़े के नीचे सूजन, मुंह से अत्यधिक लार निकलना, नाक से स्राव, सांस लेने में कठिनाई और गले से घरघराहट जैसी आवाजें सुनाई देती हैं। कई मामलों में पशु चारा खाना छोड़ देते हैं, दूध उत्पादन कम हो जाता है और समय पर इलाज नहीं मिलने पर उनकी मृत्यु भी हो सकती है।
लक्षण दिखते ही करें यह काम
पशु चिकित्सा विभाग ने पशुपालकों को सलाह दी है कि यदि किसी पशु में ऐसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत अन्य पशुओं से अलग रखें, प्राथमिक उपचार शुरू करें और नजदीकी पशु चिकित्सालय अथवा पशु चिकित्सा अधिकारी से तत्काल संपर्क करें। यदि किसी क्षेत्र में बड़ी संख्या में पशुओं में संक्रमण के लक्षण दिखाई दें तो इसकी सूचना तत्काल विभाग को दें।
राज्यभर में बढ़ाई गई निगरानी
विभाग ने सभी जिलों में पशुधन की सुरक्षा के लिए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, समय पर टीकाकरण और त्वरित उपचार से मानसून के दौरान पशुओं को इस गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखा जा सकता है।



