सीजी भास्कर, 21 मार्च। जिले में सरकारी आवास व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े (Gariaband Housing Scam) हो गए हैं। स्थिति ऐसी बन गई है कि जहां नियमों की अनदेखी कर कई अधिकारी-कर्मचारी वर्षों से सरकारी मकानों पर कब्जा जमाए बैठे हैं, वहीं वर्तमान एसडीएम को रहने के लिए आवास तक नसीब नहीं हो पा रहा है।
- SDM को नहीं मिला घर, लॉज में गुजार रहे दिन
- निलंबित अफसर का अब भी कब्जा
- आधे से ज्यादा मकानों पर नियम विरुद्ध कब्जा
- यह स्थिति सरकारी संपत्तियों के दुरुपयोग की ओर इशारा करती है।
- रिकॉर्ड तक नहीं, कैसे हुआ आवंटन?
- जांच के आदेश, कार्रवाई के संकेत
- उन्होंने संकेत दिए हैं कि
- इन सभी पहलुओं की जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
देवभोग क्षेत्र की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी समेत अन्य विभागीय परिसरों में बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी नियमों को ताक पर रखकर सरकारी आवास का उपयोग कर रहे हैं। इसका असर सीधे प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ता दिख रहा है।
SDM को नहीं मिला घर, लॉज में गुजार रहे दिन
वर्तमान एसडीएम आर.एस. सोरी पिछले करीब 6 महीनों से पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस या निजी लॉज में रहकर अपनी जिम्मेदारियां निभा (Gariaband Housing Scam) रहे हैं। हाल ही में उन्हें मैनपुर का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया, लेकिन वहां भी आवास उपलब्ध नहीं हो सका। स्थिति इस हद तक बिगड़ी है कि जिन अधिकारियों के पास आवास होना चाहिए, वही इससे वंचित हैं।
निलंबित अफसर का अब भी कब्जा
चौंकाने वाली बात यह है कि निलंबित अपर कलेक्टर तुलसी दास मरकाम अब भी दोनों अनुविभागों में शीर्ष अधिकारियों के लिए आरक्षित सरकारी आवासों पर कब्जा बनाए हुए हैं। इसके अलावा कई ऐसे अधिकारी और कर्मचारी भी हैं, जिनका तबादला हो चुका है, लेकिन उन्होंने अब तक सरकारी आवास खाली नहीं किया।
आधे से ज्यादा मकानों पर नियम विरुद्ध कब्जा
हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के 42 आवासों में से लगभग आधे पर नियमों के विपरीत कब्जा बताया जा रहा है।
कई लोग बिना पात्रता के रह रहे हैं
कुछ ने हाउस रेंट तक जमा नहीं किया
मेंटेनेंस कार्य भी प्रभावित हो रहा है
यह स्थिति सरकारी संपत्तियों के दुरुपयोग की ओर इशारा करती है।
रिकॉर्ड तक नहीं, कैसे हुआ आवंटन?
सबसे गंभीर पहलू यह है कि आवास आवंटन से जुड़ा कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड तक उपलब्ध (Gariaband Housing Scam) नहीं है। नियम के अनुसार एसडीएम कार्यालय से आवंटन आदेश जारी होना चाहिए, लेकिन कई मामलों में इसका कोई दस्तावेजी प्रमाण नहीं मिल रहा है। कुछ कर्मचारियों ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर एक से ज्यादा आवास भी कब्जे में ले रखे हैं, जबकि कई अपात्र लोग भी क्वार्टर में रह रहे हैं।
जांच के आदेश, कार्रवाई के संकेत
अपर कलेक्टर पंकज डाहरे ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि पूरी स्थिति की विस्तृत जांच कराई जाएगी।
उन्होंने संकेत दिए हैं कि
कितने लोगों ने तबादले के बाद भी आवास नहीं छोड़ा
कितने अपात्र लोगों को आवास मिला
किस आधार पर आवंटन हुआ



