सीजी भास्कर 22 अप्रैल I हाईकोर्ट के जस्टिस एके प्रसाद ने अनुकंपा नियुक्ति और पारिवारिक जिम्मेदारियों से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति कोई निजी उपहार या विरासत में मिली संपत्ति नहीं है, बल्कि यह परिवार को आर्थिक संकट से उबारने के लिए दी जाने वाली सहायता है। (HC’s comment on compassionate appointment)
अदालत ने बहू को चेतावनी दी कि यदि वह अपनी आश्रित सास का भरण-पोषण नहीं करती है, तो उसकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है।
पति और बेटे की मौत के बाद बेसहारा हुई महिला
अंबिकापुर निवासी विधवा ज्ञांती तिवारी अपने पति घनश्याम तिवारी (पुलिस विभाग में कांस्टेबल) की 2001 में मौत के बाद बेटे अविनाश तिवारी के सहारे थीं, जिसे अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। बाद में अविनाश की शादी नेहा तिवारी से हुई, लेकिन दिसंबर 2021 में उसकी भी मृत्यु हो गई।
नौकरी मिलने के बाद बदला व्यवहार : HC’s comment on compassionate appointment
अविनाश की मौत के बाद उसकी पत्नी नेहा तिवारी को अनुकंपा नियुक्ति दी गई। आरोप है कि नौकरी मिलने के बाद उसने अपनी सास के साथ दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया और उनके भरण-पोषण से भी इनकार कर दिया, जिससे वृद्ध महिला आर्थिक तंगी में जीवन यापन करने को मजबूर हो गई।
शर्त के आधार पर मिली थी नौकरी
पीड़ित महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बताया कि बहू को यह नौकरी इस शर्त पर दी गई थी कि वह अपनी सास की देखभाल करेगी। इसके बावजूद वह इस जिम्मेदारी से पीछे हट गई। (HC’s comment on compassionate appointment)
नियुक्ति रद्द करने की मांग
याचिका में बहू नेहा तिवारी की 8 मार्च 2022 की नियुक्ति रद्द करने और उसकी जगह अविवाहित बेटी प्रीति तिवारी को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग की गई। महिला का कहना है कि बहू ने शपथ-पत्र देकर देखभाल का वादा किया था, लेकिन नौकरी मिलते ही उन्हें बेसहारा छोड़ दिया।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी : HC’s comment on compassionate appointment
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि बहू ने नियुक्ति के समय सास की देखभाल करने का शपथ-पत्र दिया था। कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति पूरे परिवार की सुरक्षा के लिए होती है और पति की जगह नौकरी पाने पर बहू पर वही कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी लागू होती है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई कर्मचारी अपने आश्रितों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से पीछे हटता है, तो सरकार की नीति के तहत उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है। (HC’s comment on compassionate appointment)


