सीजी भास्कर, 07 जुलाई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (High Court) ने 23 साल पुराने एक आपराधिक मामले में ट्रायल कोर्ट का मूल रिकॉर्ड गायब होने पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकल पीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित जिला एवं सत्र न्यायाधीश को हरसंभव प्रयास कर रिकॉर्ड तलाशने के निर्देश दिए हैं। वहीं संबंधित पुलिस अधीक्षक (एसपी) को भी अगली सुनवाई में मूल केस डायरी अदालत में प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
2003 की आपराधिक अपील की सुनवाई के दौरान सामने आया मामला
मामला वर्ष 2003 का है, जिसमें अपीलकर्ता संजय सिंह ने राज्य शासन के खिलाफ आपराधिक अपील दायर की थी। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में जारी जमानती वारंट के अनुपालन में अपीलकर्ता संजय सिंह व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुआ। अदालत ने उसकी उपस्थिति दर्ज करने के बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ाई।
इसी दौरान न्यायालय के समक्ष पेश की गई रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि इस प्रकरण से संबंधित ट्रायल कोर्ट का मूल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है और वह लंबे समय से गायब है।
हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में मौजूद हैं कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि ट्रायल कोर्ट का मूल रिकॉर्ड भले ही उपलब्ध नहीं है, लेकिन हाईकोर्ट की फाइल में इस मामले से संबंधित ऑर्डर शीट, कुछ गवाहों के बयान, अभियोजन एवं बचाव पक्ष के दस्तावेजों की प्रतियां सुरक्षित हैं। इसके बावजूद मूल रिकॉर्ड का गायब होना न्यायिक प्रक्रिया के लिए गंभीर विषय माना गया।
जिला जज को रिकॉर्ड तलाशने के निर्देश
न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास ने संबंधित जिला न्यायाधीश को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई से पहले ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड तलाशने के लिए सभी आवश्यक और गंभीर प्रयास किए जाएं।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अगली सुनवाई तक रिकॉर्ड नहीं मिलता है, तो जिला जज को लिखित रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इसमें यह बताना होगा कि रिकॉर्ड की तलाश के लिए अब तक कौन-कौन से कदम उठाए गए और किन कारणों से रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो सका। हाईकोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को भी निर्देश दिया है कि आदेश की प्रति दो दिनों के भीतर संबंधित जिला न्यायाधीश को भेजी जाए।
एसपी को मूल केस डायरी पेश करने का आदेश
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से पैरवी कर रहे पैनल अधिवक्ता सुरेश टंडन को निर्देश दिया गया कि वे संबंधित पुलिस अधीक्षक को आवश्यक निर्देश जारी कर अगली सुनवाई पर इस मामले की मूल केस डायरी अदालत में प्रस्तुत कराएं। अदालत ने माना कि रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में केस डायरी जांच और सुनवाई के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित हो सकती है।
20 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता अविनाश चंद साहू ने पैरवी की। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 अगस्त 2026 की तारीख निर्धारित की है। इस दिन जिला जज की रिपोर्ट, रिकॉर्ड की स्थिति और पुलिस द्वारा प्रस्तुत केस डायरी पर आगे सुनवाई की जाएगी।



