सीजी भास्कर, 07 जुलाई। छत्तीसगढ़ में मानसून (Monsoon Update) अब पूरी तरह रफ्तार पकड़ चुका है। जून में अपेक्षाकृत धीमी शुरुआत के बाद जुलाई के पहले सप्ताह में हुई लगातार बारिश ने वर्षा के आंकड़ों को सामान्य स्तर के बेहद करीब पहुंचा दिया है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 1 जून से 7 जुलाई तक प्रदेश में औसतन 241.7 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। यह पिछले 10 वर्षों की इसी अवधि की औसत 252.7 मिमी वर्षा का 95.6 प्रतिशत है। इससे स्पष्ट है कि इस बार प्रदेश में मानसून की स्थिति संतोषजनक बनी हुई है और खेती-किसानी के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार हो रही हैं।
प्रदेश में बारिश की स्थिति पर राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष लगातार नजर बनाए हुए है। नदी-नालों के जलस्तर की निगरानी के साथ ही जिलों से बारिश की रिपोर्ट नियमित रूप से ली जा रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जा सकें।
बलरामपुर और कोरबा में सबसे अधिक बारिश
पिछले 24 घंटों के दौरान यानी 6 जुलाई तक प्रदेश में औसतन 22.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई। इस अवधि में सबसे अधिक 67.6 मिमी बारिश बलरामपुर जिले में हुई। इसके बाद कोरबा में 54.9 मिमी, रायपुर में 45.3 मिमी और सूरजपुर में 42.8 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।
वहीं बस्तर संभाग के कुछ जिलों में बारिश अपेक्षाकृत कम रही। सुकमा में केवल 0.4 मिमी और दंतेवाड़ा में 0.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई। हालांकि मौसम विभाग का अनुमान है कि आगामी दिनों में दक्षिण छत्तीसगढ़ में भी बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ सबसे आगे, कई जिलों में सामान्य से अधिक बारिश
बारिश के कुल आंकड़ों की बात करें तो सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला पूरे प्रदेश में सबसे आगे है। यहां अब तक 453.3 मिमी वर्षा दर्ज की जा चुकी है, जो सामान्य वर्षा का 213.3 प्रतिशत है। इसके अलावा रायपुर में 136.9 प्रतिशत, सक्ती में 134.7 प्रतिशत, दंतेवाड़ा में 129.2 प्रतिशत, दुर्ग में 126.6 प्रतिशत और बलरामपुर में 126.3 प्रतिशत वर्षा दर्ज की गई है। बिलासपुर में 86.1 प्रतिशत, जांजगीर-चांपा में 101 प्रतिशत, बेमेतरा में 93.2 प्रतिशत तथा नारायणपुर में 91.8 प्रतिशत सामान्य वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
दूसरी ओर सुकमा जिला अभी भी सबसे पीछे बना हुआ है, जहां सामान्य का केवल 55.4 प्रतिशत वर्षा हुई है। मोहला-मानपुर (63.3 प्रतिशत), गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (64.3 प्रतिशत) और सरगुजा (67.5 प्रतिशत) में भी अब तक सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।
खरीफ फसलों की बुआई और रोपाई को मिला फायदा
लगातार हो रही बारिश का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिल रहा है। पर्याप्त नमी मिलने से खरीफ फसलों की बुआई और धान की रोपाई का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। कृषि विभाग के अनुसार जिन क्षेत्रों में पहले पानी की कमी के कारण किसान इंतजार कर रहे थे, वहां अब खेती के कार्यों में तेजी आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में भी इसी तरह संतुलित वर्षा होती रही तो धान सहित अन्य खरीफ फसलों का उत्पादन बेहतर रहने की संभावना है। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष अलर्ट, आगे भी बारिश के संकेत
राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष के प्रभारी अधिकारियों ने बताया कि प्रदेशभर में नदी-नालों के जलस्तर और वर्षा की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियों में और बढ़ोतरी की संभावना जताई है। ऐसे में प्रशासन ने नागरिकों से मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने और जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने की अपील की है।



