सीजी भास्कर, 11 मई । छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण और वेतन भुगतान मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ शब्दों में विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया है कि 15 दिनों के भीतर कर्मचारियों को नियमित पद के अनुरूप वेतन और लंबित देयकों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। (High Court’s strictness)
अवमानना याचिका पर हुई सुनवाई : High Court’s strictness
मामले की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु की कोर्ट में हुई। कर्मचारियों की ओर से दायर अवमानना याचिका में बताया गया कि न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन अब तक आदेशों का पालन नहीं कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत
याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट को बताया गया कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दायर स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) और रिव्यू पिटीशन को भी सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया पहले ही खारिज कर चुका है। इसके बावजूद दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समान वेतन और अन्य सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं।
2023 के आदेश के बाद भी नहीं हुआ पालन
सुनवाई के दौरान कर्मचारियों के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2023 में पारित आदेश के बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने कर्मचारियों को नियमित कर्मचारी के समान पूरा लाभ नहीं दिया। न तो नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी की गई और न ही बकाया भुगतान किया गया। High Court’s strictness
हाईकोर्ट ने दिए सख्त निर्देश
मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय प्रशासन को 15 दिनों के भीतर आदेश का पालन करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि तय समयसीमा में आदेश का पालन नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।


