सीजी भास्कर, 08 मई। रायपुर के कचना इलाके में इन दिनों सरकारी जमीन पर चल रहे अवैध उत्खनन को लेकर लोगों के बीच चर्चा तेज (Illegal Mining) हो गई है। इलाके में दिनदहाड़े भारी मशीनों की आवाज और लगातार दौड़ते ट्रकों ने आसपास रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से यहां मिट्टी, मुरूम और पत्थर निकालने का काम खुलेआम चल रहा है, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से अवैध काम करने वालों के हौसले बढ़ गए हैं।
शुक्रवार को जब मौके पर हलचल बढ़ी और बाहरी लोगों की एंट्री हुई तो पूरे इलाके में अचानक अफरा तफरी मच गई। मशीनें बंद होने लगीं और वाहन तेजी से निकलने लगे। कुछ देर तक इलाके में भगदड़ जैसे हालात बने रहे। लोगों का कहना है कि यहां पहले से निगरानी करने वाले लोग तैनात रहते हैं जो हर गतिविधि पर नजर रखते हैं।
जेसीबी छोड़कर भागा चालक Illegal Mining
मौके पर पहुंची टीम को देखकर अवैध उत्खनन में लगे लोगों में हड़कंप मच गया। ट्रक और जेसीबी चालक तेजी से वाहन लेकर भागने लगे। बताया गया कि पीछा किए जाने पर करीब एक किलोमीटर आगे जाकर रास्ता खत्म हो गया। इसके बाद जेसीबी चालक मशीन बीच रास्ते में छोड़कर फरार हो गया।
30 एकड़ से ज्यादा जमीन खोदे जाने का दावा
जानकारी के मुताबिक इलाके में बड़े स्तर पर खुदाई की गई है। आरोप है कि करीब 30 एकड़ से ज्यादा सरकारी जमीन को खोदकर वहां से भारी मात्रा में खनिज सामग्री निकाली जा चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समतल जमीन अब गहरे गड्ढों में बदलती जा रही है।
खनिज विभाग पर उठ रहे सवाल (Illegal Mining)
पूरा इलाका कलेक्ट्रेट मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर बताया जा रहा है। इसके बावजूद इतने बड़े स्तर पर अवैध उत्खनन होने से विभागीय निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि इतने लंबे समय तक चल रहे इस काम की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंची।
निगरानी के लिए लगाए गए लोग
इलाके में मौजूद लोगों का दावा है कि अवैध उत्खनन करने वालों ने आसपास निगरानी के लिए अपने लोग तैनात कर रखे हैं। जैसे ही कोई बाहरी वाहन या व्यक्ति इलाके में पहुंचता है, तुरंत सूचना पहुंचा दी जाती है। इसके बाद ट्रक और मशीनें मौके से हटाई जाने लगती हैं।
कार्रवाई का इंतजार
स्थानीय लोगों का कहना है कि खुलेआम सरकारी जमीन से खनिज निकालने का काम (Illegal Mining) जारी है, लेकिन अब तक सख्त कार्रवाई नहीं हुई है। अब लोगों की नजर प्रशासन पर टिकी है कि इस पूरे मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।


