सीजी भास्कर, 20 जून : प्रदेश में रेत खनन पर प्रतिबंध लागू होने के बावजूद अवैध उत्खनन (Illegal Sand Mining ) का कारोबार लगातार जारी है। प्रदेश की 56 छोटी-बड़ी नदियों में रेत माफिया संगठित सिंडिकेट बनाकर धड़ल्ले से खनन कर रहे हैं। हाल के दिनों में अवैध रेत कारोबार को लेकर हुए विवादों, हमलों और हिंसक घटनाओं के बाद यह मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। प्रतिबंध के बावजूद नदी तटों पर मशीनों और भारी वाहनों की आवाजाही जारी रहने से प्रशासनिक निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारों का कहना है कि प्रदेश में रेत खनन का अवैध नेटवर्क कई जिलों तक फैला हुआ है, जहां रात के अंधेरे से लेकर दिन के समय तक नियमों की अनदेखी कर रेत निकाली जा रही है। इससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है, बल्कि नदियों की पारिस्थितिकी और जल संसाधनों पर भी गंभीर असर पड़ रहा है।
120 स्वीकृत घाटों के मुकाबले सैकड़ों स्थानों पर खनन
जानकारी के अनुसार प्रदेश में रेत उत्खनन के लिए 120 घाटों को स्वीकृति प्रदान की गई थी। इसके अलावा 450 से अधिक संभावित घाटों की पहचान कर उन्हें 169 क्लस्टरों में विभाजित किया गया था। हालांकि वर्तमान में वैध खदानें बंद होने के बावजूद कई स्थानों पर बिना अनुमति रेत निकासी जारी है।
स्थानीय लोगों और पर्यावरण से जुड़े जानकारों का दावा है कि अधिकृत घाटों की तुलना में अवैध घाटों की संख्या कहीं अधिक है। कई क्षेत्रों में नदी के भीतर अस्थायी सड़कें बनाकर पोकलेन मशीनों और भारी वाहनों के जरिए बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है।
जांजगीर-चांपा की हसदेव नदी, रायगढ़ की मांड नदी, सूरजपुर की महान नदी सहित कई अन्य नदी क्षेत्रों से अवैध खनन की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
नदियों के अस्तित्व और पर्यावरण पर बढ़ता खतरा
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित रेत खनन नदियों की प्राकृतिक संरचना को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। नदी में मौजूद रेत जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अत्यधिक उत्खनन से नदी तल गहरा होने लगता है, जिससे आसपास के क्षेत्रों का भूजल स्तर भी प्रभावित होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार लगातार हो रहे अवैध खनन से कई नदियों का प्राकृतिक स्वरूप बदलने लगा है। इससे कटाव बढ़ने, जैव विविधता प्रभावित होने और भविष्य में जल संकट गहराने की आशंका भी बढ़ रही है। नदी तंत्र कमजोर होने से कृषि, पेयजल और पर्यावरणीय संतुलन पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।
प्रशासन ने कार्रवाई तेज करने का किया दावा
खनिज विभाग का कहना है कि वर्तमान में प्रदेश की सभी वैध रेत खदानें बंद हैं और अवैध खनन रोकने के लिए जिला प्रशासन तथा खनिज विभाग की संयुक्त टीमें लगातार कार्रवाई कर रही हैं। विभाग के अनुसार राज्य स्तरीय फ्लाइंग स्क्वायड को भी सक्रिय रखा गया है और सूचना मिलने पर तत्काल छापामार कार्रवाई की जा रही है।
अधिकारियों का दावा है कि अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। संबंधित जिलों को निगरानी बढ़ाने और नियमित जांच अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
कार्रवाई के बावजूद उठ रहे सवाल Illegal Sand Mining
हालांकि प्रशासनिक दावों के बावजूद कई जिलों से लगातार अवैध खनन की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि प्रतिबंध के बावजूद बड़ी संख्या में ट्रैक्टर और हाइवा वाहनों के माध्यम से रेत का परिवहन जारी है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर प्रतिबंध और कार्रवाई के बावजूद अवैध कारोबार पर पूरी तरह रोक क्यों नहीं लग पा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल छापामार कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसके लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत करने, तकनीकी मॉनिटरिंग बढ़ाने तथा अवैध खनन में शामिल नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है।





