सीजी भास्कर, 7 अगस्त 2026 : छत्तीसगढ़ में धर्म परिवर्तन (Chhattisgarh Conversion Rules 2026) को लेकर नए नियम लागू कर दिए गए हैं। अब कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म बदलना चाहता है तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत 90 दिन पहले जिला कलेक्टर को लिखित जानकारी देनी होगी। वहीं मूल धर्म में वापसी यानी घर वापसी की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है और इसके लिए 15 दिन में जांच पूरी करने का प्रावधान किया गया है।
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ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज होगा धर्म परिवर्तन का रिकॉर्ड
छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य नियम-2026 के तहत अब हर धर्मांतरण (Conversion) का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को संभावित तारीख से कम से कम 90 दिन पहले कलेक्टर कार्यालय में निर्धारित प्रारूप में घोषणा पत्र जमा करना होगा। इसके बाद प्रशासन मामले की जांच कर आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा। नए नियमों के अनुसार धर्म परिवर्तन के लिए किसी तीसरे पक्ष की अनुमति जरूरी नहीं होगी। व्यक्ति की इच्छा और तय कानूनी प्रक्रिया के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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घर वापसी की प्रक्रिया 15 दिन में होगी पूरी
मूल या पैतृक धर्म में वापस लौटने वाले लोगों के लिए प्रक्रिया को सरल रखा गया है। इसके लिए व्यक्ति को अपनी पूरी जानकारी प्रशासन को देनी होगी। सूचना मिलने के बाद 15 दिनों के भीतर जांच पूरी कर घर वापसी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
विवाह के लिए धर्म परिवर्तन पर भी कड़े नियम
अंतरधार्मिक विवाह (Interfaith Marriage) या विवाह के उद्देश्य से धर्म परिवर्तन करने वालों के लिए भी नए प्रावधान बनाए गए हैं। यदि विवाह में धर्म परिवर्तन शामिल है तो प्रस्तावित विवाह से कम से कम 60 दिन पहले जिला कलेक्टर को इसकी जानकारी देनी होगी। प्रशासन इस जानकारी को ऑनलाइन पोर्टल और नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करेगा। इस पर 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया जाएगा।
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जनजातीय क्षेत्रों में ग्राम सभा की राय महत्वपूर्ण
बस्तर और सरगुजा संभाग जैसे जनजातीय क्षेत्रों में धर्मांतरण से जुड़े मामलों में ग्राम सभाओं की भूमिका बढ़ाई गई है। यदि बल, प्रलोभन या धोखे से धर्म परिवर्तन की शिकायत मिलती है तो ग्राम सभा की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन और पुलिस के नोडल अधिकारी कार्रवाई करेंगे।
धर्मगुरुओं और संस्थाओं पर प्रशासन की निगरानी
नए नियमों के तहत धर्मांतरण कराने वाले धर्मगुरुओं और संस्थाओं पर भी निगरानी बढ़ाई जाएगी। धर्म परिवर्तन की सुविधा देने वाली संस्थाओं को 30 दिन पहले पंजीयन कराना होगा। यह पंजीकरण पांच साल तक मान्य रहेगा।इसके अलावा ऐसी संस्थाओं के घरेलू और विदेशी वित्तीय लेनदेन पर भी नजर रखी जाएगी।
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अवैध धर्मांतरण पर भारी सजा और जुर्माना
- सामान्य अवैध धर्मांतरण पर 7 से 10 साल तक कारावास और न्यूनतम 5 लाख रुपये जुर्माना।
- महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और नाबालिग के धर्मांतरण पर 10 से 20 साल तक कारावास और न्यूनतम 10 लाख रुपये जुर्माना।
- सामूहिक अवैध धर्मांतरण पर 10 साल से आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये तक जुर्माना।
- लोक सेवक द्वारा अवैध धर्मांतरण पर 10 से 20 साल तक सजा और 10 लाख रुपये तक जुर्माना।
- धन के लालच में धर्म परिवर्तन कराने पर 10 से 20 साल कारावास और 20 लाख रुपये तक जुर्माना।
- भय या प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने पर 10 से 20 साल कारावास और 30 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
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