सीजी भास्कर, 04 जुलाई : गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में डीडी अस्पताल लापरवाही (DD Hospital Negligence) मामले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गौरेला स्थित डी.डी. अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर (OT) और आईसीयू (ICU) को सील कर दिया है। कलेक्टर एवं पर्यवेक्षी प्राधिकारी डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने नर्सिंग होम एक्ट के तहत अस्पताल का पंजीयन (लाइसेंस) भी अस्थायी एवं सशर्त रूप से निरस्त करने के आदेश जारी किए हैं। यह कार्रवाई प्रसूता की मौत और जांच में सामने आई गंभीर चिकित्सीय लापरवाही के बाद की गई।
प्रसूता की मौत के बाद शुरू हुई जांच
22 जून 2026 को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल से सिम्स बिलासपुर रेफर की गई प्रसूता ज्योति सोनवानी को बीच रास्ते से वापस लाकर डी.डी. अस्पताल में भर्ती किया गया था। यहां उपचार के दौरान लापरवाही के आरोप लगे और बाद में सिम्स बिलासपुर में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद जिला प्रशासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया।
जांच में मिली गंभीर अनियमितताएं
निरीक्षण के दौरान अस्पताल में गंभीर मरीज भर्ती होने के बावजूद चिकित्सकों और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की अनुपस्थिति पाई गई। जांच दल ने यह भी पाया कि गंभीर मरीजों के उपचार के लिए आवश्यक संसाधनों का अभाव था। इसके अलावा आयुष्मान भारत योजना के हितग्राहियों से अतिरिक्त शुल्क लेने संबंधी शिकायतें भी सामने आईं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा सिविल सर्जन-सह-मुख्य अस्पताल अधीक्षक द्वारा किए गए पुनः निरीक्षण में भी कई गंभीर खामियां उजागर हुईं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों के बिना हो रहा था गंभीर मरीजों का इलाज
जांच में सामने आया कि एक्लेम्प्सिया जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज का उपचार आवश्यक विशेषज्ञों और पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं के बिना किया गया। अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ, एनेस्थेटिस्ट तथा पोस्ट ऑपरेटिव देखभाल के लिए आवश्यक चिकित्सक एवं प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध नहीं थे। इसके बावजूद गंभीर मरीजों का उपचार किया जा रहा था, जिसे गंभीर चिकित्सीय लापरवाही माना गया।
कारण बताओ नोटिस का जवाब भी संतोषजनक नहीं
प्रकरण में अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। अस्पताल द्वारा प्रस्तुत जवाब और जांच प्रतिवेदन के परीक्षण में कई तथ्य गलत पाए गए। प्रशासन ने पाया कि अस्पताल प्रबंधन ने नर्सिंग होम एक्ट तथा छत्तीसगढ़ राज्य उपचर्यागृह तथा रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं अनुज्ञापन अधिनियम, 2020 के प्रावधानों का उल्लंघन किया है। जांच के दौरान एक अन्य गंभीर प्रसूता के उपचार में भी लापरवाही के तथ्य सामने आए।
ऑपरेशन थिएटर और ICU सील, लाइसेंस अस्थायी रूप से निरस्त
सभी जांच प्रतिवेदनों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने डी.डी. अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू वार्ड को तत्काल प्रभाव से सील करने के आदेश जारी किए हैं। साथ ही अस्पताल का पंजीयन (लाइसेंस) अस्थायी एवं सशर्त रूप से निरस्त कर दिया गया है। आदेश की प्रतिलिपि स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई है। DD Hospital Negligence: प्रसूता की मौत के बाद हुई जांच में डी.डी. अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी, गंभीर मरीजों के उपचार में लापरवाही तथा नियमों के उल्लंघन के प्रमाण मिले। इसके बाद जिला प्रशासन ने अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू को सील कर लाइसेंस अस्थायी रूप से निरस्त कर दिया।



