सीजी भास्कर, 7 अगस्त 2026 : डॉ. भीमराव आंबेडकर (Ambedkar Post Case) के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आरोपी महिला को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने Instagram पोस्ट मामले में दर्ज FIR और एससी-एसटी एक्ट के तहत चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि इस स्तर पर तथ्यों और साक्ष्यों की विस्तृत जांच नहीं की जा सकती, यह काम ट्रायल के दौरान होगा।
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हाईकोर्ट ने कहा- प्रथम दृष्टया अपराध बनता है
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि चार्जशीट में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में शुरुआती चरण में आपराधिक कार्रवाई में हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा। अदालत ने आरोपी महिला की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें FIR और एससी-एसटी एक्ट के तहत आरोप तय करने के आदेश को चुनौती दी गई थी।
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Instagram पोस्ट के बाद दर्ज हुई थी FIR
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी महिला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram पर डॉ. भीमराव आंबेडकर के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी पोस्ट की थी। इसके बाद शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की गई। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) के तहत चार्जशीट दाखिल की थी।
कोर्ट नहीं करेगा ‘मिनी ट्रायल‘
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि BNSS की धारा 528 के तहत याचिका की सुनवाई करते समय अदालत सबूतों की विश्वसनीयता की जांच नहीं कर सकती। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का मूल्यांकन या मामले की गहराई से जांच करना ट्रायल कोर्ट का अधिकार है। अदालत ने कहा कि आरोपी की ओर से उठाए गए मुद्दे जैसे पोस्ट का संदर्भ, टिप्पणी करने की मंशा और जांच में कथित कमियां विवादित तथ्य हैं। इनका फैसला सुनवाई के दौरान ही किया जा सकता है।
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SC/ST Act की धाराओं पर भी राहत नहीं
आरोपी ने यह तर्क भी दिया था कि संज्ञान आदेश में एससी-एसटी एक्ट की धाराओं का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर कार्रवाई को अवैध नहीं माना जा सकता, जब तक आरोपी यह साबित न कर दे कि इससे उसे वास्तविक नुकसान या पूर्वाग्रह हुआ है।
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याचिका खारिज, ट्रायल जारी रहेगा
हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला उन दुर्लभ परिस्थितियों में नहीं आता, जहां अदालत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर आपराधिक कार्यवाही को खत्म करे। इसके साथ ही कोर्ट ने FIR रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। अब मामले की आगे की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी।
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